‘आश्रम’ से ‘गंगाजल’ तक; प्रकाश झा की वो रचनाएं, जिन्होंने हिला दी राजनीति और धर्म की बुनियाद
Prakash Jha Controversial Movies: प्रकाश झा और विवाद मानो साथ-साथ चलते हैं. उनकी ज्यादातर फिल्में या तो सेंसर बोर्ड की अड़चनों में फंसती हैं या फिर किसी न किसी सामाजिक या राजनीतिक समूह के विरोध का सामना करती हैं. आज 27 फरवरी को निर्देशक-प्रोड्यूसर अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं. जानिए उनकी कुछ विवादित लेकिन जबरदस्त फिल्मों के बारे में.
साल 1984 में बनाई पहली फिल्म
प्रकाश झा ने साल 1984 में पहली फीचर फिल्म 'हिप-हिप हुर्रे' बनाई थी.
इस फिल्म ने दिलाई पहचान
इसके बाद वह फिल्म आई जिसके लिए उन्हें सबसे अधिक पहचान मिली. साल 1984 में 'दामुल' रिलीज हुई. 1985 में डायरेक्टर ने इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स पुरस्कार जीता. यह फिल्म बिहार में बंधुआ मजदूरी के मुद्दे पर आधारित थी.
गंगाजल
साल 2003 में फिल्म 'गंगाजल' आई. इस फिल्म की कहानी भागलपुर-बिहार के कुख्यात अंखफोड़वा कांड की घटना पर आधारित थी, जिसमें 33 कैदियों की आंखों में पेचकस से वार किया गया था और बाद में पुलिस द्वारा उनकी आंखों में तेजाब डालने से वे अंधे हो गए थे. फिल्म में गंगाजल को तेजाब के रूप में बताया गया है. इस फिल्म को लेकर भी विवाद हुआ था.
आश्रम
बॉबी देओल अभिनीत वेब सीरीज आश्रम को प्रकाश झा ने निर्देशित किया था. इस फिल्म में दिखाया जाता है कि कैसे एक साधु लोगों को गुमराह करता है भद्दे कामों को भी पीछे से चलाता है. यह पाखंड और अंधविश्वास को भी दिखाता है.
आरक्षण
प्रकाश झा द्वारा निर्देशित 'आरक्षण' (2011) फिल्म भारत में शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में जाति-आधारित आरक्षण के विवादास्पद मुद्दे पर आधारित एक सामाजिक-राजनीतिक ड्रामा है.
राजनीति
महाभारत के किरदारों को आधुनिक राजनीति से जोड़कर प्रकाश झा ने 'राजनीति' बनाई है. महाभारत में धर्म बनाम अधर्म की लड़ाई थी, लेकिन अब 'पॉवर' के लिए लड़ने वाले लोग किसी कानून-कायदे को नहीं मानते हैं.
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (2016) एक बोल्ड ड्रामा है जो भारत के छोटे शहर की चार महिलाओं की सीक्रेट ज़िंदगी, सेक्सुअल इच्छाओं और दबी हुई इच्छाओं को दिखाती है.
सत्याग्रह
सत्याग्रह एक ऐसे बेटे की कहानी है जो पिता के लिए तड़पता है. एक ऐसे पिता की कहानी है जो अपने खोए हुए बेटे के गम में डूबा है. एक ऐसी युवती की कहानी है जो जीवन से इतना संघर्ष करती है कि प्यार करना ही भूल गई है।. एक महत्वाकांक्षी विद्रोही की कहानी है, जिसके लिए कर्म ही मूल मंत्र है.