Premanand Ji Maharaj: ‘क्या एक ही पति हर जन्म में मिलेगा?’ भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने किया खुलासा
Premanand Ji Maharaj: सनातन धर्म में विवाह को केवल एक सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है. यह बंधन सिर्फ दो व्यक्तियों को जोड़ता नहीं है, बल्कि दो परिवारों का भी मेल कराता है. शादी के बाद पति-पत्नी दोनों यही चाहते हैं कि उनका रिश्ता स्थिर, सुखी और मजबूत बने. हिंदू धर्म में विवाह को 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है और इसे एक जन्म तक सीमित नहीं, बल्कि कई जन्मों तक चलने वाला रिश्ता माना जाता है.
क्या सात जन्मों में एक ही पति मिलना संभव है?
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज अक्सर सोशल मीडिया पर अपने विचारों और जवाबों से लोगों के मन की उलझनें सुलझाते हैं. एक वीडियो में एक महिला ने उनसे यह सवाल पूछा कि क्या यह संभव है कि उसे सातों जन्मों में एक ही पति मिले?
प्रेमानंद जी महाराज का जवाब क्या था?
महाराज जी ने इस प्रश्न का उत्तर बहुत ही सरल भाषा में दिया. उन्होंने कहा कि इस जन्म में पति-पत्नी का साथ मिलना **उनके कर्मों और भाग्य** पर निर्भर करता है. इसलिए यह तय नहीं किया जा सकता कि इस जन्म में जो जोड़ी है, वह अगले जन्म में भी पति-पत्नी बनेगी.महाराज जी ने स्पष्ट किया कि हर जन्म में वही जीवनसाथी मिलना निश्चित नहीं होता, यह केवल संयोग या भाग्य की बात है.
फिर क्या अगले जन्म में वही पति-पत्नी बन सकते हैं?
महाराज जी ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति की भक्ति, समर्पण और ईश्वर की कृपा मजबूत हो, तो अगले जन्म में फिर से एक ही साथी मिलना संभव है.
लेकिन यह सिर्फ भावनाओं या चाहत से नहीं होता. इसके लिए ईश्वर की विशेष कृपा और कठोर भक्ति की आवश्यकता होती है.
ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण
महाराज जी के अनुसार, यदि कोई पुरुष या महिला ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ प्रार्थना करे, तो आने वाले जन्मों में भी वही जीवनसाथी मिल सकता है, और यहां तक कि सात जन्म तक भी यह संभव हो सकता है.
प्रेमानंद जी महाराज की एक प्रेरक कहानी
महाराज जी ने इसे समझाने के लिए एक मार्मिक कथा भी सुनाई. कहानी में एक पति अपनी पत्नी से बेहद प्रेम करता था, लेकिन उसने गुरु-भक्ति और साधना का मार्ग नहीं अपनाया. वहीं उसकी पत्नी भक्ति में अधिक लगन रखती थी.मृत्यु के बाद पत्नी अगले जन्म में राजकुमारी बनती है, जबकि पति को हाथी का शरीर मिलता है. लेकिन पत्नी की तपस्या और भक्ति से दोनों को फिर से एक साथ होने का मौका मिलता है, और अगले जन्म में वे पुनः मिलते हैं.