Premanand Maharaj: भूतों का राजा बनने की इच्छा लेकर पहुंचा भक्त, प्रेमानंद महाराज ने हंसते हुए दिया जवाब
Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज अपने सहज वचनों और गहरी आध्यात्मिक समझ के लिए जाने जाते हैं. उनके विचार न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान भी सरल तरीके से बताते हैं. यही कारण है कि लोग अपनी मानसिक उलझन, डर और परेशानियों के समाधान के लिए प्रेमानंद महाराज की शरण लेते हैं.
अजीब सवाल जिसने सबको चौंका दिया
हाल ही में एक व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से एक असामान्य इच्छा जाहिर की. उसने कहा कि वह अदृश्य शक्तियों पर शासन करना चाहता है, क्योंकि उसके अनुसार वे उसकी मां को परेशान कर रही हैं. यह बात सुनकर महाराज पहले मुस्कुराए और फिर बहुत सहजता से उन्होंने इस सोच को सही दिशा दी.
महाराज का सरल उत्तर
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अदृश्य शक्तियों के स्वामी स्वयं भगवान शंकर हैं, जिन्हें भूतेश्वर कहा जाता है. उन्होंने समझाया कि नकारात्मक शक्तियों पर शासन करने की इच्छा रखने से बेहतर है, देवत्व की ओर बढ़ा जाए. उन्होंने कहा कि समस्या का मूल समाधान बाहरी डर में नहीं, बल्कि भीतर की साधना में है.
नाम जप में है हर समस्या का समाधान
महाराज ने स्पष्ट किया कि भय, नकारात्मकता और मानसिक अशांति से मुक्ति का सबसे सरल उपाय भगवत नाम का जप है. यदि व्यक्ति अपने जीवन में शक्ति और सुरक्षा चाहता है, तो उसे बजरंग बली का स्मरण करना चाहिए. सच्चे मन से किया गया नाम जप हर प्रकार की नकारात्मकता को दूर करता है.
डर से नहीं, भक्ति से मिलती है मुक्ति
महाराज ने रामचरितमानस की पंक्ति का भाव समझाते हुए कहा कि जब श्रीराम के सेवक का नाम लेने से ही नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं, तो स्वयं प्रभु के नाम का स्मरण व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त कर सकता है. उन्होंने कहा कि डरने की बजाय राम नाम या राधा-राधा का स्मरण करना चाहिए.
व्यक्तिगत अनुभव से दिया भरोसा
प्रेमानंद महाराज ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने गंगा तट पर साधना के दौरान और श्मशान में विश्राम करते समय कई बार अदृश्य अनुभव किए, लेकिन सच्ची भक्ति और ईश्वर में अटूट विश्वास के कारण उन्हें कभी कोई हानि नहीं हुई.
हर व्यक्ति को क्यों नहीं होता कष्ट?
महाराज ने समझाया कि सृष्टि में 84 लाख योनियां मानी गई हैं, जिनमें एक अवस्था ऐसी भी है. लेकिन हर व्यक्ति को इससे कष्ट नहीं होता. केवल वही लोग प्रभावित होते हैं जिनके कर्म अशुद्ध होते हैं. उन्होंने कहा कि कई बार यह ईश्वर की व्यवस्था के अंतर्गत चेतावनी या दंड का रूप भी हो सकता है.
असली सुरक्षा
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यदि व्यक्ति अपने कर्म, आचरण और विचार शुद्ध रखे, तो किसी भी नकारात्मक शक्ति का उस पर प्रभाव नहीं पड़ सकता. सच्ची भक्ति, सत्कर्म और नाम स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी ढाल है.