तेजी से बढ़ रहा इंजेक्शन से वजन कम करने का ट्रेंड, डॉ. संजय अग्रवाल ने क्यों किया अलर्ट?
सोशल मीडिया पर पांच मिनट स्क्रॉल करें और आपको यह दिख जाएगा कि किस सेलिब्रिटी ने चुपके से वेट लॉस इंजेक्शन का इस्तेमाल किया, पहले और बाद की तस्वीरें आदि इस बारे में कई तरह की अफ़वाहें. अचानक जो डायबिटीज़ के लिए डॉक्टर की लिखी दवा हुआ करती थी, उसके बारे में ऐसे बात हो रही है जैसे यह कोई ब्यूटी हैक हो. वेट लॉस दवाओं को लेकर चर्चा बहुत बढ़ गई है. चलिए इसके बारे में जानते हैं.
कुछ लोगों के लिए ये दवाएं जरूरी हैं
आरोग्य धाम हॉस्पिटल ग्वालियर के डॉक्टर, तोरन यादव के मुताबिक, कुछ लोगों के लिए ये दवाएं मेडिकली तौर पर डॉक्टर की सलाह पर दी जाती हैं. क्योंकि, यह मरीज की जिंदगी बदलने वाली होती हैं. यह ब्लड शुगर को मैनेज करने में मदद करती हैं. यह गंभीर हेल्थ रिस्क को कम करती हैं. डॉक्टर की देखरेख में ये मोटापे से जुड़ी दिक्कतों से जूझ रहे लोगों का वज़न घटाने में मदद कर सकती हैं, यह सच है.
फिगर मैंटेन के लिए नुकसानदायक
लेकिन यह भी सच है कि इन दवाओं को अब शॉर्टकट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. इसे एक ट्रेंड के तौर पर देखा जाने लगा है. जब कोई पब्लिक फ़िगर तेज़ी से वजन कम करता है, तो लोग नोटिस करते हैं. वे अंदाजा लगाते हैं और उसे कॉपी करने लगते हैं. यहीं से चीजें गड़बड़ हो जाती हैं. इसलिए लोग क्लिनिक में जाकर वही दवा मांगते हैं, भले ही वे मेडिकली क्वालिफ़ाई न हों.
बिना डॉक्टरी सलाह के नुकसान
डॉक्टर्स का कहना है कि कुछ इसे ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं. कुछ इसे बिना यह समझे ले लेते हैं कि यह कैसे काम करती है? और कुछ तब चौंक जाते हैं जब जी मिचलाना, थकान, पाचन की दिक्कतें, या मूड में बदलाव बहुत ज़्यादा महसूस होते हैं. ऐसे में फिर लोग हॉस्पिटल भागते हैं. इसलिए बिना किसी डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए.
क्या सच में मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है?
ट्रेंड में आने से पहले कुछ मुश्किल सवाल पूछना सही रहेगा. क्या आपको सच में मेडिकल ट्रीटमेंट की ज़रूरत है? या आप प्रेशर, तुलना, और अनरियलिस्टिक स्टैंडर्ड पर रिएक्ट कर रहे हैं? अगर वजन कम करने वाली दवाओं के बारे में सोचा जा रहा है, तो उन पर किसी क्वालिफाइड डॉक्टर से ईमानदारी से बात करनी चाहिए. किसी दोस्त या किसी फ़िटनेस इन्फ़्लुएंसर से नहीं.
डॉक्टर ने क्या बताया?
सह्याद्री सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पुणे के डायबिटीज, ओबेसिटी और मेटाबोलिक डिजीज के HOD डॉ. संजय अग्रवाल ने इस बारे में बताया कि टिरज़ेपेटाइड और सेमाग्लूटाइड दोनों ही दवाओं की एक कैटेगरी में आती हैं जो पेट के हार्मोन के एक्शन पर काम करती हैं. यह भूख, इंसुलिन निकलने और ग्लूकोज के रेगुलेशन में शामिल होते हैं. वे कहते हैं कि वेगोवी 30 या उससे ज़्यादा BMI वाले मरीज़ों में लंबे समय तक वेट मैनेजमेंट के लिए बताई जाती है. वजन से जुड़ी कोमोरबिडिटी जैसे हाइपरटेंशन, टाइप 2 डायबिटीज़, डिस्लिपिडेमिया, या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में इसे दिया जाता है.
मौंजारो किसे दी जाती है?
मौंजारो को शुरू में टाइप 2 डायबिटीज़ के इलाज के लिए मंज़ूरी मिली थी. इसका इस्तेमाल मेडिकली सुपरवाइज़्ड मरीज़ों में मोटापे के लिए भी किया जा रहा है. ये दवाएं उन लोगों के लिए सबसे अच्छी हैं जो मोटापे या ज़्यादा वज़न की समस्या से जूझ रहे हैं. जहां डाइट, एक्सरसाइज़ और व्यवहार में बदलाव करने के बावजूद, लंबे समय तक कोई सफलता नहीं मिली है.
यह दवा किसे यूज नहीं करना चाहिए?
डॉक्टर कहते हैं कि इन दवाओं का इस्तेमाल उन लोगों के लिए नहीं किया जाना चाहिए जो कॉस्मेटिक मकसद से वजन कम करना चाहते हैं. यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन दवाओं को ध्यान से सोचने के बाद ही दिया जाना चाहिए. डॉक्टर कहते हैं और चेतावनी देते हैं कि मेडुलरी थायरॉइड कार्सिनोमा, MEN2 सिंड्रोम, पैंक्रियाटाइटिस, और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर की हिस्ट्री वाले मरीज शायद सही कैंडिडेट न हों.
हो सकती हैं ये समस्याएं
उन्होंने कहा कि शुरुआती स्टेज में जी मिचलाना, उल्टी और पेट की दिक्कतें आम हैं. डॉक्टर ने कहा कि मेडिकल तरीकों से वजन कम करना कोई ट्रेंड नहीं बल्कि एक इलाज है. इन दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन हमेशा हर किसी के हिसाब से अलग होता है और इसे खुद से नहीं लेना चाहिए. इस आर्टिकल में एक्सपर्ट्स की राय दी गई है. इन जानकारियों का इस्तेमाल यह समझाने के लिए किया गया कि वजन कम करने वाली दवाएं कौन लोग ले सकते हैं और किसे किसी भी कीमत पर इन्हें लेने से बचना चाहिए.
डिस्क्लेमर
डिस्क्लेमर - यह आर्टिकल कई स्त्रोतों से जानकारी के आधार पर लिखा गया है. यह गैलरी कोई मेडिकल सलाह नहीं है यह सिर्फ सूचना और सामान्य जानकारी प्रदान करती है. किसी भी कंडीशन में डॉक्टर से मिलें, तभी ट्रीटमेंट लें. Indianews.in तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है.