Silent killer spices: साइलेंट किलर क्यों बन सकते हैं ये 5 मसाले, कहीं आप तो नहीं कर रहे सेहत से खिलवाड़?
Silent killer spices: इसमें कोई शक नहीं कि रसोई के रखे मसाले भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं. मसालों के बिना खाना खाने का मन भी नहीं करेगा. लेकिन, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के CEO सुधांशु पंत ने कई प्रयोगशाला रिपोर्टों के साथ एक चेतावनी जारी की है कि इनमें मौजूद मिलावट इन्हें साइलेंट किलर बना रहे है. दुनिया भर में तब हंगामा मच गया जब हांगकांग के सेंटर फॉर फूड सेफ्टी (CFS) ने भारतीय मसालों में जहरीले एथिलीन ऑक्साइड की मौजूदगी की पुष्टि की. चलिए जानते हैं कौन से मसालों पर हमें ध्यान देने की जरूरत है.
मसाले का अधिक यूज नुकसानदायक
इसके बाद स्पाइसेस बोर्ड ऑफ इंडिया के समन्वयक एस. कन्नन ने स्पष्ट किया कि मसालों के लिए परीक्षण प्रोटोकॉल अब और भी सख्त किए जाएंगे. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में पोषण विशेषज्ञ डॉ. फ्रांसेस्को ब्रांका का कहना है कि मसालों का अत्यधिक सेवन शरीर के आंतरिक अंगों में सूजन पैदा कर सकता है.
मसालों में कैंसर वाले रसायन
आंकड़ों से पता चलता है कि बाजार में उपलब्ध लगभग 15 से 20 प्रतिशत खुले मसालों में कैंसर पैदा करने वाले रसायन होते हैं. नतीजतन, मसालों की शुद्धता की जांच करना अब केवल व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं रह गया है बल्कि यह आपके जीवन की सुरक्षा के लिए बिल्कुल अनिवार्य हो गया है.
हांगकांग फूड सेफ्टी की वार्निंग
हांगकांग के सेंटर फॉर फूड सेफ्टी (CFS) ने भारतीय मसालों में जहरीले एथिलीन ऑक्साइड की मौजूदगी की पुष्टि की. इसका मतलब है कि हम जो मार्केट से मसाले लेकर आते हैं उन पर आंख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए. यह अंदर से आपको खोखला बनाने में लगे हुए हैं.
हल्दी में लेड क्रोमेट
हल्दी का पीला रंग और निखारने के लिए अक्सर इसमें 'लेड क्रोमेट' मिलाया जाता है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड की शोधकर्ता डॉ. एमी सोटा के शोध के अनुसार, लेड (सीसा) शरीर के तंत्रिका तंत्र के लिए जहर का काम करता है. यह बच्चों में दिमाग के विकास में रुकावट डालता है और बड़ों में अल्ज़ाइमर याददाश्त कम करने वाली बीमारी का खतरा बढ़ाता है. इसके अलावा, हल्दी का ज्यादा सेवन करने से शरीर में एनीमिया (खून की कमी) हो सकता है, क्योंकि यह आयरन के अवशोषण में रुकावट डालता है.
लाल मिर्च पाउडर में मिलावट
लाल मिर्च पाउडर में अक्सर 'एथिलीन ऑक्साइड' पाया जाता है. अपनी रिपोर्ट में इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की डॉ. मैरी शुबॉयर-बेरिगन ने बताया कि यह केमिकल सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है. मिलावटी लाल मिर्च पाउडर खाने से पेट की अंदरूनी परत में जलन और सूजन हो जाती है. लंबे समय तक ऐसा करने से पेट के कैंसर या किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. आसान शब्दों में कहें तो यह मिर्च पाउडर आपके पेट को अंदर से खोखला कर देता है.
दालचीनी से लिवर पर असर
बाजार में असली दालचीनी के विकल्प के तौर पर अक्सर 'कैसिया' बेची जाती है. जर्मन फ़ेडरल इंस्टीट्यूट फ़ॉर रिस्क असेसमेंट (BfR) के निदेशक डॉ. एंड्रियास हेंसेल ने चेतावनी दी है कि कैसिया में 'कौमारिन' की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है. यह कौमारिन सीधे लिवर पर हमला करता है. ऐसे लोगों में लिवर में घाव और लिवर खराब होने की रिपोर्टें लगातार बढ़ रही हैं, जो नियमित रूप से बड़ी मात्रा में हर्बल काढ़ा या दालचीनी वाला पानी पीते हैं.
काली मिर्च में भी मिलावट
काली मिर्च उन मसालों में से एक है जिसमें सबसे ज़्यादा मिलावट की जाती है. अक्सर इसमें पपीते के बीज मिला दिए जाते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन (NIN) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हेमलता के अनुसार, पपीते के बीजों में मौजूद तत्व पाचन तंत्र को बुरी तरह से बिगाड़ और नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर काली मिर्च का बारीक पाउडर गलती से सांस की नली में चला जाए, तो इससे फेफड़ों में तेज जलन हो सकती है और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. यह स्थिति खासकर बुज़ुर्गों के लिए बहुत खतरनाक होती है.
अधिक जायफल है नुकसानदायक
जायफल में 'मिरिस्टिसिन' (myristicin) नामक एक यौगिक पाया जाता है. मेडिकल टॉक्सिकोलॉजिस्ट डॉ. लियोन ग्रुएनबाम के शोध से पता चलता है कि यदि कोई व्यक्ति एक बार में 6 ग्राम से अधिक जायफल का सेवन करता है, तो उसे दृश्य मतिभ्रम (visual hallucinations) का अनुभव हो सकता है और वह अपनी चेतना खोने लग सकता है. इससे तंत्रिका तंत्र पर भारी दबाव पड़ता है और हृदय गति इतनी तेजी से बढ़ सकती है कि दिल का दौरा पड़ने की स्थिति बन सकती है.
डिस्क्लेमर
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