Somnath Swabhiman Parv: सोमनाथ मंदिर की इन झलकियों ने मोहा लोगों मन, PM मोदी मंदिर में मौजूद
Somnath Swabhiman Parv: धार्मिक ग्रंथों में सनातन को आध्यात्मिकता की धुरी कहा जाता है. सत्य ही शिव है, के भाव को आज भी भारत की हवा में महसूस किया जाता है. जब भी बारह ज्योतिर्लिंग की बात आती है, उसमें सबसे पहला स्थान सोमनाथ मंदिर का आता है. यहां पर जहां गंगा और यमुना की धाराएं बहती हैं, जहां अदृश्य रूप से सरस्वती का प्रवाह आज भी चेतना को स्पर्श करता है. यह जगह सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं है, बल्कि भारतीय आत्मा का आद्य केंद्र भी है. प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी अपने तीन-दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं. रविवार को पीएम ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे. शनिवार को वह सोमनाथ पहुंचे थे. जहां उन्होंने देर शाम सोमनाथ मंदिर में ‘ॐकार मंत्र’ के जाप में भाग लिया था.
पीएम मोदी ने किया ॐ कार जाप
पीएम मोदी ने X पर तस्वीरे पोस्ट की और लिखा कि ॐ हमारे वेदों का, शास्त्रों का, पुराणों का, उपनिषदों और वेदांत का सार है.
आस्था का केंद्र है सोमनाथ मंदिर
सोमनाथ मंदिर आज आस्था का बड़ा केंद्र है. यहां की ऊर्जी लोगों को आह्लादित कर देती है. यहां का पर्यावरण भक्तों के मन में शांति प्रदान करता है और उन्हें मोटिवेट करता है. यह जगह सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं है, बल्कि भारतीय आत्मा का आद्य केंद्र भी है.
महमूद गजनवी ने 17 बार मंदिर को लूटा
विदेशी आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था. उसने 17 बार मंदिर को छूटा और छह टन से ज्यादा सोना लूटकर ले गया था. इसके बाद कई दूसरे विदेशी आक्रमणकारियों ने मंदिर को तोड़ा और खंडहर में बदला. लेकिन, आज यह धार्मिक केंद्र मजबूती से खड़ा है.
लाखों श्रद्धालु आते हैं हर साल दर्शन करने
सोमनाथ मंदिर गुजरात का एक अहम तीर्थ होने के साथ-साथ टूरिज्म का स्थान भी है. यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं
प्रधानमंत्री ने लाइटिंग ड्रोन शो का उठाया लुत्फ
सोमनाथ मंदिर में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के दौरान भव्य ड्रोन शो का लुत्फ उठाया, जहाँ उन्होंने प्राचीन आस्था और आधुनिक तकनीक के संगम की सराहना की.
किताबों में है वर्णन
यल एशियाटिक सोसाइटी में छपे मोहम्मद नाजिम 'सोमनाथ एंड द कॉनक्वेस्ट बाई सुल्तान महमूद' (Somnath and the Conquest by Sultan Mahmud) के लेख के अनुसार, सोमनाथ मंदिर की छत पिरामिड शेप में बनी थी. 13 मंजिला ऊंचे इस मंदिर का शिखर सोने से बने थे. फर्श सागवान की लकड़ी से बनाया गया था.
आस्था के आगे असत्य को झुकना पड़ा
सोमनाथ को जितनी बार तोड़ा गया, यह अगली बार फिर से उठ खड़ा हुआ. लोगों की भक्ति और आस्था के आगे आताताइयों को आखिर हारना पड़ा. आज भी यहां के मौन में उस इतिहास को महसूस किया जा सकता है. असत्य की हार और सत्य की जीत हुई.