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रामभक्त की गवाही ने वापस दिलाई राम को उनकी जन्मभूमि, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के अनकहे किस्से

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य चित्रकूट में रहने वाले एक भारतीय हिंदू आध्यात्मिक नेता, शिक्षक, संस्कृत विद्वान, बहुभाषी, कवि, लेखक, पाठ्य टीकाकार , दार्शनिक, संगीतकार, गायक और नाटककार हैं. वर्ष 1988 में उन्हें जगद्गुरु की उपाधि प्रदान की गयी. उन्हें दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.  

Last Updated: January 15, 2026 | 6:05 PM IST
Founder of Tulsipith - Photo Gallery
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तुलसी पीठ के संस्थापक

रामभद्राचार्य चित्रकूट में तुलसीदास के नाम पर स्थापित एक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्था तुलसी पीठ के संस्थापक और प्रमुख हैं. उनका बचपन का नाम गिरिधर मिश्रा था.

Lost his sight at the age of two months - Photo Gallery
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दो महीने की उम्र में खो दी थी दृष्टि

24 मार्च 1950 को उनकी आँखों में ट्रेकोमा का संक्रमण हो गया. गाँव में इलाज के लिए कोई उन्नत सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए उन्हें पास के एक गाँव की एक बुजुर्ग महिला के पास इलाज के लिये ले जाया गया. महिला ने उनकी आँखों में मायरोबालन का पेस्ट लगाया ताकि गांठें फूट जाएँ, लेकिन उनकी आँखों से खून बहने लगा, जिसके परिणामस्वरूप उनकी दृष्टि चली गई.

Able to speak 22 languages - Photo Gallery
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22 भाषाएं बोलने में हैं सक्षम

रामभद्राचार्य 22 भाषाएं बोल सकते हैं और भोजपुरी, संस्कृत, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में सहज कवि और लेखक हैं. उन्होंने संस्कृत में कई ग्रंथ और टीकाएं लिखी हैं.

Lack of formal education - Photo Gallery
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औपचारिक शिक्षा का अभाव

जगद्गुरु रामभद्राचार्य को ब्रेल लिपि नहीं आती है. दृष्टिबाधित होने की वजह से उनकी औपचारिक शिक्षा नहीं हुई है. लेकिन उन्होंने सुन-सुनकर बहुत सारे धार्मिक ग्रंथों को कंठस्थ किया है. उन्होंने 240 से अधिक पुस्तकें और 50 शोध पत्र लिखे हैं.

Memorized 700 verses of the Bhagavad Gita at the age of five - Photo Gallery
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पांच वर्ष की आयु में कण्ठस्थ किये गीता के 700 श्लोक

पांच वर्ष की आयु में, रामभद्राचार्य ने अपने पड़ोसी मुरलीधर मिश्रा की सहायता से 15 दिनों में संपूर्ण भगवद गीता (अध्याय और श्लोक संख्या सहित 700 श्लोक) को याद कर लिया। 1955 में जन्माष्टमी के दिन उन्होंने संपूर्ण भगवद गीता का पाठ किया. इसी तरह सात वर्ष की आयु में,उन्होंने अपने दादा की सहायता से 60 दिनों में तुलसीदास की संपूर्ण रामचरितमानस को याद कर लिया था.

Testimony in the Ayodhya case - Photo Gallery
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अयोध्या मामले में गवाही

जुलाई 2003 में रामभद्राचार्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद मामले के अन्य मूल वाद संख्या 5 में धार्मिक मामलों के विशेषज्ञ गवाह (ओपीडब्ल्यू 16) के रूप में गवाही दी. उनके हलफनामे और जिरह के कुछ अंश उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय में उद्धृत किए गए हैं. अपने हलफनामे में, उन्होंने रामायण, रामतापनीय उपनिषद , स्कंद पुराण , यजुर्वेद , अथर्ववेद और अन्य प्राचीन हिंदू ग्रंथों का हवाला दिया, जिनमें अयोध्या को हिंदुओं के लिए पवित्र नगर और राम की जन्मभूमि बताया गया.

Disclaimer - Photo Gallery
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यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है. हम निजी या अपुष्ट विवरणों की सटीकता का दावा नहीं करते हैं. यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है.

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