North Sentinel Island: भारत की इस जगह पर भारतीय भी नहीं जा सकते, यहां कदम रखने का मतलब है मौत को दावत देना
North Sentinel Island: भारत में ऐसी कई जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती के बावजूद आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं. कुछ इलाकों में सुरक्षा कारणों से पाबंदियां लगाई गई हैं, तो वहीं कुछ जगहों पर पर्यावरण और वहाँ के स्थानीय निवासियों की सुरक्षा के लिए ये पाबंदियां लागू हैं. इन सबके बीच एक ऐसी जगह भी है जहां जाना न सिर्फ़ मना है बल्कि वहां जाने की कोशिश करना भी जानलेवा साबित हो सकता है. यह जगह है नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड, जो अपने रहस्यों और खतरनाक हालात की वजह से लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है.
उत्तरी सेंटिनल द्वीप
उत्तरी सेंटिनल द्वीप अंडमान सागर में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के अंतर्गत स्थित है. यह पोर्ट ब्लेयर से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. लगभग 60 से 72 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह द्वीप घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है. हालांकि, यहां इंसानों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है.
सेंटिनलीज जनजाति का निवास
दरअसल, भारत सरकार ने इस द्वीप को एक जनजातीय आरक्षित क्षेत्र घोषित किया है. इस द्वीप पर रहने वाली सेंटिनलीज़ जनजाति बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग रहती है. ये लोग अपने इलाके में किसी भी बाहरी व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं करते और उन्हें देखते ही उन पर हमला कर देते हैं.
सरकार ने जाने पर लगाया बैन
सरकार ने इस क्षेत्र में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है, क्योंकि बाहरी लोगों के संपर्क में आने से इस जनजाति में बीमारियां फैल सकती हैं, जिससे उनके अस्तित्व को ही खतरा पैदा हो सकता है. परिणामस्वरूप, इस द्वीप से एक निश्चित दूरी के भीतर भी जाना गैर-कानूनी है.
नॉर्थ सेंटिनल द्वीप सबसे खतरनाक जगह
नॉर्थ सेंटिनल द्वीप को दुनिया की सबसे खतरनाक जगहों में से एक माना जाता है. यहां बाहरी लोगों पर हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं. 2018 में जॉन एलन चाऊ नाम के एक अमेरिकी मिशनरी की हत्या सेंटिनलीज़ लोगों ने कर दी थी, जब वह उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा था.
दो मछुआरों की कर दी थी हत्या
इससे पहले 2006 में इस जगह पर पहुंचने पर दो भारतीय मछुआरों की भी हत्या कर दी गई थी. इन घटनाओं के बाद, सरकार ने नियमों को और भी सख्त कर दिया और अब बिना अनुमति के इस क्षेत्र में प्रवेश करना एक गंभीर अपराध माना जाता है.
पारंपरिक जीवनशैली में जीवन
इस जनजाति को दुनिया के सबसे अलग-थलग और प्राचीन समुदायों में से एक माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि उनके पूर्वज हज़ारों साल पहले यहां आकर बस गए थे और वे आज भी उसी पारंपरिक जीवनशैली में जी रहे हैं.
वन संसाधनों पर निर्भर
उनकी आबादी बहुत कम है और वे शिकार, मछली पकड़ने तथा वन-संसाधनों पर निर्भर रहते हैं. धनुष-बाण और भाले उनके मुख्य हथियार माने जाते हैं और वे बाहरी लोगों को एक खतरे के रूप में देखते हैं.
डिस्क्लेमर
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