पीरियड्स को छोड़िए… इसके अलावा वेजाइनल ब्लीडिंग क्यों हो सकती है? समझिए इसके पीछे के 10 बड़े कारण
Vagainal Bleeding Cause: पीरियड्स के दौरान महिलाओं में वजाइना से ब्लीडिंग होना सामान्य बात है. यह उनके अच्छे स्वास्थ्य का संकेत है. लेकिन, अगर सामान्य दोनों में योनि से ब्लड आए को चिंता की बात है. यही नहीं, कई बार पीरियड्स के दौरान भी ज्यादा या अधिक दिनों तक ब्लीडिंग होना भी ठीन नहीं होता है. बीमारी को तेजी से बढ़ाने में हमारी लापरवाही ही दोषी होती है. दरअसल, ज्यादातर महिलाएं इसे पीरियड्स का प्रभाव या सामान्य कारण मानकर नजरअंदाज कर देती हैं. इसी नतीजा है कि, इस ब्लीडिंग से बीमारी दोगुनी हो जाती है. अब सवाल है कि आखिर, वजाइना से होने वाला रक्तस्राव किन समस्याओं का संकेत? किन-किन परेशानियों का करना पड़ सकता सामना? इस परेशानी से बचने के लिए क्या करें? आइए जानते हैं इस बारे में-
गर्भाशय की दीवार में सूजन
बच्चेदानी में सूजन के एक प्रमुख लक्षणों में से एक है वैजाइनल ब्लीडिंग. दरअसल, बच्चेदानी में सूजन का कारण एंडोमेट्राइटिस (Endometriosis) भी है. इस दौरान गर्भाशय के भीतरी परतों में सूजन आ जाती है और लंबे समय तक इसका उपचार ना करवाने से ये गंभीर रूप ले कर असामान्य ब्लीडिंग का कारण होता है.
गर्भाशय में फाइब्रॉइड
असामान्य ब्लीडिंग गर्भाशय में फाइब्रॉइड (गांठ) का होना का सबसे आम लक्षण है. अगर ट्यूमर गर्भाशय गुहा के भीतर या गर्भाशय की परत के पास स्थित है, तो ये पीरियड्स के अलावा भी ज्यादा ब्लीडिंग होने का कारण होता है. ऐसे में डॉक्टर को दिखा कर इसका इलाज करवाना जरूरी है.
अचानक वजन घटना
असामान्य ब्लीडिंग और अचानक से वजन घटने के बीच वैसे तो कोई रिश्ता नहीं है पर कई बार देखा गया है कि वजन का आपके शरीर के हार्मोन संतुलन पर प्रभाव पड़ता है. इस प्रकार, कम वजन होने से स्पॉटिंग या अनियमित रक्तस्राव हो सकता है.
अचानक वजन बढ़ना
अचानक वजन बढ़ना: तनाव और डायबिटीज जैसे बीमारियों में कई बार तेजी से वजन बढ़ने लगता है और जिसके कारण असामान्य ब्लीडिंग हो सकती है. दरअसल, ये दोनों ही स्थितियां हार्मोनल डिसबैलेंस की ओर ले जाती हैं और कई बार पीसीओडी (PCOD) का कारण बनती हैं. जिसकी वजह से भी पीरियड्स के अलावा ब्लीडिंग होती है.
गर्भाशय में पॉलीप्स
गर्भाशय में पॉलीप्स का मतलब है कि गर्भाशय की दीवार पर ढेर सारे छोटे-छोटे उभार, जो कि र्भाशय ग्रीवा यानी कि योनि और गर्भाशय के बीच की संरचना है पर विकसित होते हैं. कुछ मामलों में, पॉलीप्स असामान्य ब्लीडिंग का कारण बन सकता है और इसे हटाने की जरूरत हो सकती है.
अंडाशय का कैंसर
गर्भाशय में कैंसर (Uterus Cancer) ज्यादातर उन महिलाओं को प्रभावित करता है जो मेनोपॉज तक पहुंच चुकी हैं. इसका मतलब है कि उनके पास अब उन्हें पीरियड्स नहीं हो रहा है और ये अनियमित ब्लीडिंग गर्भाशय कैंसर का लक्षण है.
पीसीओएस की दिक्कत
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक ऐसी स्थिति है जो अनियमित पीरियड्स का कारण बन सकती है, साथ ही पीरियड्स के बीच कुछ ब्लीडिंग भी हो सकता है. अन्य लक्षणों में प्रजनन क्षमता की समस्याएं, वजन बढ़ना, ऑयली स्किन और मुंहासे होना आदि शामिल हैं. अंडाशय कैंसर, अंडाशय में होता हैं. इसमें असामान्य रूप से कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाती हैं और संक्रमण का कारण बनती है.
गर्भनिरोधक दवाएं
पीरियड्स के अलावा अनियमित ब्लीडिंग का कारण गर्भनिरोधक दवाएं भी हो सकती हैं. दरअसल, ये हार्मोनल डिसबैलेंस पैदा करती हैं जिससे अनियमित रक्तस्राव तोता है. यह आमतौर पर गर्भनिरोधक का उपयोग करने के पहले 3 महीनों के दौरान ही होता है. इसके अलावा आईयूडी डिवाइस के प्रयोग के कारण भी वजाइनल ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है.
गर्भाशय का संक्रमण
यूटरेस इंफेक्शन या डिस्चार्ज कभी-कभी मूत्र पथ से संबंधित समस्याओं से भी जुड़ा होता है. दरअसल, इस दौरान इंफेक्शन के कारण गर्भाशय में बैक्टीरिया कोशिकाओं को तेजी नुकसान पहुंचाने लगती है, जिसके चलते संक्रमण बढ़ने पर ब्लीडिंग होने लगती है.
गर्भाशयम में ट्यूमर
गर्भाशयम में ट्यूमर होने के कारण भी महिलाओं में असामान्य ब्लीडिंग की समस्या देखी जाती है. अगर ट्यूमर गर्भाशय गुहा के भीतर या गर्भाशय की परत के पास स्थित है, तो यह ज्यादा ब्लीडिंग का कारण हो सकता है. ऐसे में आपको इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए.