Parenting Mistakes: पैरेंट्स की ये 5 गलतियां बच्चे की पढ़ाई में डालती हैं रुकावट! आपका लाड़ला तो इसका शिकार नहीं
Child Study Tips: हर माता-पिता का सपना होता है कि उसका बच्चा इंटेलीजेंट हो. लेकिन, कई बार देखने में आता है कि बच्चा पढ़ाई में रुचि नहीं ले रहा होता है. ऐसे में उसे मारने-पीटने के बजाय खुद की आदतों पर भी गौर करें. हो सकता है कि पैरेंट्स अनजाने में कुछ गलतियां कर रहे हों! क्योंकि, जरूरत से ज्यादा कंट्रोल, सिर्फ नंबरों पर ध्यान देना या पढ़ाई को बोरिंग बना देना, ये कुछ ऐसी पेरेंटिंग मिस्टेक्स (Parenting mistakes) हैं जो बच्चे को पढ़ाई से दूर कर सकती हैं. एक शोध के मुताबिक, सही स्ट्रेटजी अपनाकर आप न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ा सकते हैं, बल्कि उसे खुद से सीखने के लिए मोटिवेट भी कर सकते हैं. जानिए बच्चे की पढ़ाई और उसके परफॉर्मेंस को बेहतर करने के लिए आपको अपनी पेरेंटिंग स्टाइल में किन बातों पर ध्यान रखना होगा.
अधिक कंट्रोल
अगर आप बच्चे पर पढ़ाई का जरूरत से ज्यादा दबाव डाल रहे हैं, तो यह उसे बोरिंग लगने लगेगी. बेहतर होगा बच्चे को फ्रीडम और चॉइस दें. उसे यह महसूस कराएं कि पढ़ाई उसकी खुद की जिम्मेदारी है.
सिर्फ नंबरों पर फोकस
हर बार अच्छे नंबर लाने की अपेक्षा करने से बच्चे पर मानसिक दबाव बढ़ता है. इसलिए उसके सीखने की प्रक्रिया को सराहें, न कि सिर्फ रिजल्ट पर ध्यान दें. उसे नई चीजें एक्सप्लोर करने दें.
पढ़ाई को बोरिंग बनाना
अगर पढ़ाई को सिर्फ रटने और होमवर्क तक सीमित कर दिया जाए तो बच्चा जल्दी ऊब जाता है.सही तरीका होगा अगर आप पढ़ाई को खेल और एक्टिविटीज के जरिए मजेदार बनाएं.
स्क्रीन टाइम ठीक से मैनेज न करना
अगर बच्चे को मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम पर ज्यादा एक्सपोजर मिला हुआ है तो इससे ध्यान भटकाता है. बेहतर होगा कि स्क्रीन टाइम को बैलेंस करें और पढ़ाई के बाद एक फिक्स टाइम पर ही मनोरंजन की अनुमति दें.
खुद एक अच्छा उदाहरण न बनना
अगर माता-पिता खुद पढ़ने या सीखने में दिलचस्पी नहीं दिखाते, तो बच्चा भी मोटिवेट नहीं होगा. इसलिए सही तरीका होगा कि बच्चे के सामने बुक्स पढ़ें, नई चीजें सीखें, जिससे वह आपको देखकर मोटिवेट हो.
बच्चे की पढ़ाई में रुचि बढ़ाने का तरीका
अगर आप चाहते हैं कि, बच्चे में पढ़ाई के लिए रुचि बढ़े तो कुछ तरीके अपनाना चाहिए. इसके लिए पढ़ाई का एक तय समय फिक्स करें. किताबों के बजाय प्रैक्टिकल और विजुअल लर्निंग अपनाएं. छोटी-छोटी उपलब्धियों पर बच्चे को प्रोत्साहित करें. इसके अलावा, बच्चे की परेशानियों को समझें और उसे सहज महसूस कराएं.