विलुप्त होती जा रही हैं ये क्षेत्रीय मिठाइयां, कभी थीं त्योहारों और शादियों की शान, देखें Photos
गुझिया, अनरसा ये सब ऐसी मिठाइयां हैं, जो त्योहारों की पहचान तो हैं ही साथ ही भारत की लोक संस्कृति की भी पहचान हैं. भारत की क्षेत्रीय मिठाइयां सिर्फ खाने की चीज़ें नहीं हैं, बल्कि ये पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां हैं. भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में कई तरह की मिठाइयां बनती हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये घरों से विलुप्त होती जा रही हैं. कुछ मिठाइयों के तो नाम भी आज की युवा पीढ़ी को नहीं याद होंगे. यहां ऐसी ही कुछ मिठाइयों के बारे में बताया गया है.
अधिरसम
यह एक प्रकार की भारतीय मिठाई है जो चावल, गुड़, घी और कभी-कभी नारियल से और इलायची, तिल, काली मिर्च और अदरक पाउडर जैसे मसालों के साथ बनाई जाती है. तमिलनाडु में कई उत्सवों पर यह मिठाई घर पर बनाई जाती है.
छेना जलेबी
छेना जलेबी या छेना जिलापी भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी राज्य ओडिशा का एक मीठा व्यंजन है। यह छेना से बनी एक मिठाई है। यह ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य पूर्वी क्षेत्रों में लोकप्रिय है.
टमाटर का हलवा
टमाटर का हलवा एक अनोखी और स्वादिष्ट मीठी डिश है, जिसे पके हुए टमाटर, घी, चीनी/खोया और मेवों के साथ बनाया जाता है. यह मुख्य रूप से हैदराबाद और आस-पास के इलाकों में बनाया जाता है.
थेन मिट्टाई
थेन मिट्टाई, जिसे 'हनी स्वीट' भी कहा जाता है, दक्षिण भारत की एक मशहूर 'पेटी कड़ाई' रेसिपी है. यह स्वादिष्ट मिठाई बचपन की यादें ताज़ा करने वाली एक खास मिठाई है, जिसे चावल और उड़द दाल से बनाया जाता है। इसे तलने के बाद चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है.
अलेपक
अलेपक (या अले पाक) महाराष्ट्र की एक पारंपरिक शीतकालीन मिठाई है और कर्नाटक के बेलगावी (बेलगाम) में एक लोकप्रिय स्ट्रीट फ़ूड है, जो अपने मीठे और मसालेदार अदरक के स्वाद के लिए जानी जाती है। मुख्य रूप से, यह ताज़े अदरक, चीनी और घी से बनी अदरक की बर्फी है, जो पाचन में सहायक और सर्दी-जुकाम से राहत दिलाने के लिए प्रसिद्ध है.
मक्खन बड़ा
बालूशाही या मक्खन बड़ा भारतीय उपमहाद्वीप से एक मिठाई है. बालूशाही मैदा या आटे से बनती है और गहरे घी में तली जाती है. इसके बाद उसे चीनी की चाशनी में डुबाया जाता है. यह UP और बिहार में शादियों के दौरान बनने वाली प्रसिद्ध मिठाई है.