छत्तीसगढ़ में इस जगह ग्रैविटी को मिलती है चुनौती, नीचे से ऊपर की तरफ बहता है ‘उल्टा पानी’
Ulta Pani Mystery: आपने ग्रैविटी के बारे में तो पढ़ा या सुना ही होगा. इसका सिद्धांत है कि कोई भी चीज ऊपर से नीचे की तरफ गिरती है. लेकिन अगर हम कहें कि भारत में एक ऐसी जगह है, जहां पर पानी नीचे से ऊपर की तरफ आता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि पानी ही नहीं गाड़ी को भी अगर आप न्यूट्रल छोड़ देते हैं, तो वो भी नीचे ढलान में जाने की बजाय ऊपर की तरफ चलती जाती है. दरअसल, छत्तीसगढ़ के सरगुजा के मैनपाट में प्रकृति के इस अजूबे को देखा जा सकता है.
छत्तीसगढ़ का शिमला
इस जगह को छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है. ये छत्तीसगढ़ में घूमने की बेस्ट जगहों में से एक है. यहां मौसम सुहाना रहता है. लोग गर्मियों और सर्दियों में प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए आते हैं. मैनपाट की सुंदरता लोगों का मन मोह लेती है. यहां पर पहाड़ी इलाका और उस पर फैली हरियाली लोगों को काफी पसंद आती हैं.
कहां है उल्टा पानी
छत्तीसगढ़ के सरगुजा के मैनपाट में एक गांव है, जिसका नाम है बिसरपानी गांव. यहां पर उल्टा पानी नाम की एक जगह है, जहां पर पानी नीचे से ऊपर की तरफ बहता है. हालांकि इसका कारण क्या है ये आज भी एक रहस्य बना हुआ है.
ग्रेविटी सिद्धांत को करता है फेल
ये ग्रैविटी के सिद्धांत को फेल करने वाला अजूबा है. कहा जाता है कि यहां पर एक पत्थर है, जिसके नीचे से पानी बहता है. ये ढलान से नीचे जाने की बजाय ऊपर की तरफ बहता है. इसी वजह से उस जगह का नाम उल्टा पानी पड़ गया.
क्या है वैज्ञानिकों का नजरिया?
वैज्ञानिक इस प्रभाव को भूदृश्य की संरचना से उत्पन्न एक प्रकाशीय भ्रम बताते हैं. क्षितिज का धुंधलापन या झुकाव एक हल्की ढलान को चढ़ाई के रूप में प्रकट करता है. वहीं, कुछ वैज्ञानिक द्रव यांत्रिकी पर आधारित भौतिक व्याख्याएं देते हैं, जैसे- साइफन क्रिया के सिद्धांत के अनुसार, जहां दबाव और भूभाग में भिन्नताएं एक ऐसा खिंचाव पैदा करती हैं, जो पानी को ढलान के विपरीत दिशा में ले जाने के लिए पर्याप्त मजबूत होता है. स्थानीय स्थलाकृति और पवन गतिकी इस भ्रम को और बढ़ा सकती हैं.
अध्ययन में हुआ खुलासा
वहीं एक अध्ययन में बिसार पानी में पानी के ऊपर चढ़ने की गति को मापा गया. जिसके बाद बताया गया कि ये पानी अपने स्रोत से 14 मीटर ऊपर तक चढ़ता है. प्रवाह वेग, चैनल ढलान और चुंबकीय तीव्रता जैसे भूभौतिकीय और जलवैज्ञानिक मापदंडों का विश्लेषण किया गया है. इससे संकेत मिलता है कि इस घटना के पीछे महज दृश्य भ्रम से कहीं अधिक कुछ है.
शिवराज सिंह ने चलाई थी कागज की नाव
बता दें कि यहां केवल पानी ही नहीं, बल्कि वहां पर डाली जाने वाली हर चीज ऊपर की तरफ आती है. कई बार सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुईं, जिनमें वे पानी में कुछ डालते हैं, तो वो नीचे की तरफ न जाकर ऊपर बहती है. वहीं कुछ समय पहले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह भी इस जगह पर गए थे. उन्होंने वहां पर कागज की नाव बनाकर चलाई थी, जो ढलान होने के बावजूद ऊपर आ गई थी. इसके बाद उन्होंने इस जगह को अजूबा बताया था.