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स्मार्ट दुल्हनें ऑनलाइन नहीं, यहां से करती हैं शॉपिंग! भारत के वो 5 ‘साड़ी हब्स’ जो आपको बना देते हैं रॉयल

शादी की साड़ी सिर्फ एक आउटफिट नहीं, एक खूबसूरत याद है. फोन की स्क्रीन पर स्वाइप करने के बजाय बनारस की गलियों या कांचीपुरम के करघों तक जाना एक जादुई अनुभव है. असली बुनाई की परख और बुनकरों का हुनर ही आपकी शादी के वॉर्डरोब को एक शानदार आर्ट गैलरी बनाता है.

Last Updated: February 23, 2026 | 4:14 PM IST
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साड़ी की दुकानों का वो 'खास' माहौल

भारत में जब आप साड़ी खरीदने निकलते हैं, तो वहां का नज़ारा ही अलग होता है. छत के पंखे की वो पुरानी आवाज़, रेशम के खुलने की सरसराहट और दुकानदार का वो मुस्कुराकर पूछना 'मैम, चाय लेंगे या ठंडा पानी?' यहाँ साड़ी खरीदना कोई जल्दबाज़ी का काम नहीं है, बल्कि सुकून से बैठकर घंटों तक धागों की कलाकारी को निहारने का अनुभव है.

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वाराणसी: जहाँ रेशम बोलता है

बनारस सिर्फ एक शहर नहीं, धागों का म्यूजियम है. यहाँ की बनारसी साड़ी को 'साड़ियों की रानी' कहा जाता है। इसकी ज़री (सोने-चांदी के धागे) कपड़े पर ऐसे चमकती है जैसे पिघला हुआ सोना गिर गया हो. अगर आप असली चीज़ चाहते हैं, तो 'पीली कोठी' के बुनकरों के पास जाएं. यहाँ की साड़ी एक इन्वेस्टमेंट है जिसे आप अपनी अगली पीढ़ी को तोहफे में दे सकते हैं.

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कांचीपुरम: दक्षिण का मज़बूत रेशम

अगर आपको ऐसी साड़ी चाहिए जो सालों-साल नई जैसी रहे, तो कांचीपुरम (तमिलनाडु) पहुँच जाइए. यहाँ की साड़ियाँ मंदिर के खंभों की तरह मज़बूत होती हैं. इनकी खासियत है 'कोरवाई' तकनीक, जिसमें बॉर्डर और साड़ी को अलग बुनकर फिर जोड़ा जाता है. सरकारी सोसायटियों से खरीदना सबसे अच्छा रहता है क्योंकि वहाँ शुद्धता की पूरी गारंटी मिलती है.

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कोलकाता: सादगी और कहानियों का संगम

कोलकाता की साड़ियाँ भारी नहीं, बल्कि बहुत कलात्मक होती हैं. यहाँ की तंत (कॉटन) साड़ी गर्मियों के लिए बेस्ट है. लेकिन अगर आपको कुछ खास चाहिए, तो 'बलुचारी' देखें, जिसके पल्लू पर रामायण और महाभारत की कहानियाँ बुनी होती हैं. साथ ही, 'कंथा' कढ़ाई वाली साड़ियाँ तो हर महिला की पसंद होती हैं.

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मैसूर: मक्खन जैसी मुलायम सादगी

मैसूर सिल्क उन लोगों के लिए है जिन्हें ताम-झाम से ज़्यादा 'क्लास' पसंद है. ये साड़ियाँ इतनी मुलायम होती हैं कि शरीर पर एकदम फिट बैठती हैं. इनमें चमक तो होती है पर शोर नहीं. असली मैसूर सिल्क के लिए KSIC के शोरूम ही जाएं, जहाँ आपको हर साड़ी के साथ एक खास पहचान नंबर मिलता है जो उसकी शुद्धता का सबूत है.

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सूरत: वैरायटी का असली खज़ाना

सूरत को कपड़ों की फैक्ट्री समझ लीजिए. यहाँ आपको पारसी स्टाइल वाली तंचोई और शानदार गजी सिल्क मिलेगी. यहाँ के बाज़ार थोड़े भीड़भाड़ वाले हो सकते हैं, लेकिन जो वैरायटी और दाम यहाँ मिलेंगे, वो पूरे भारत में कहीं और मिलना मुश्किल है. ये शहर हर बजट और हर पसंद के लिए कुछ न कुछ ज़रूर रखता है.

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खरीदारी का 'गोल्डन रूल'

चाहे आप बनारस की गलियों में हों या सूरत के बड़े बाज़ारों में, एक बात गाँठ बाँध लीजिए, हमेशा 'सिल्क मार्क' या 'हैंडलूम मार्क' ज़रूर देखें. आजकल 'प्योर' के नाम पर कुछ भी बिक जाता है, इसलिए ये छोटे-से टैग ही आपकी मेहनत की कमाई की सही कीमत और असली कपड़े की गारंटी हैं.

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क्यों जाना चाहिए इन शहरों में?

महानगरों के बड़े एसी शोरूम में सुविधा तो मिल जाती है, लेकिन बुनाई की 'आत्मा' को समझने के लिए उसके सोर्स (स्रोत) तक जाना ज़रूरी है. जब आप सीधा बुनकर या उस शहर के पुराने बाज़ार से साड़ी खरीदते हैं, तो आप सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक सदियों पुरानी विरासत का हिस्सा घर ले आते हैं.

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