US-Iran War: क्या बंद हो जाएगा इंटरनेट? ईरान के पास है ऐसी ताकत, दुनियाभर में हो सकता है ‘डिजिटल ब्लैकआउट’
Iran Internet Connectivity: ईरान से लेकर इजराइल तक गरमा-गर्मी का माहौल, एक तरफ जंग थमने का नाम नहीं ले रही वहीं दूसरी और इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है. बता दें कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, दुनिया अब एक नए संकट का सामना कर रही है. जानकारी के मुताबिक LPG फिर पेट्रोल डीजल और अब ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष से इंटरनेट सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं. इसे लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन केबल्स (पनडुब्बी केबल) को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर महसूस किया जाएगा. इसका सीधा-सीधा अर्थ है कि पूरी दुनिया में नेट की सुविधा बंद हो जाएगी और दुनिया 30-35 साल पीछे पहुँच जाएगी.
समुंद्र के नीचे फैले हैं नेट के तार
दरअसल, आज का लगभग 95 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं केबल्स के ज़रिए प्रवाहित होता है. ये केबल्स समुद्र तल पर हज़ारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं, जो विभिन्न देशों को आपस में जोड़ती हैं.
पूरी तरह ठप हो सकती हैं नेट की सुविधा
अगर किसी संघर्ष के दौरान इन्हें निशाना बनाया जाता है, तो कई देशों में इंटरनेट की गति या तो बहुत धीमी हो सकती है, या फिर सेवाएं पूरी तरह से ठप हो सकती हैं.
इन देशों से जुड़े हैं तार
हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर जैसे क्षेत्रों में यह जोखिम विशेष रूप से अधिक है. ये मार्ग एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ियों के रूप में काम करते हैं, और दुनिया के डेटा ट्रैफिक का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं से होकर गुज़रता है.
AI भी हो जाएगा बर्बाद
इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा केंद्रों जैसी तकनीकें भी इंटरनेट पर ही पूरी तरह से निर्भर हैं. नतीजतन, अगर ये केबल्स कट जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक गंभीर झटका लग सकता है.
एक बार बंद हुआ था इंटरनेट
पिछले ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जब समुद्र के नीचे बिछी केबल्स के कट जाने के बाद इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ गई थीं. इन केबल्स की मरम्मत में कई हफ़्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि गहरे समुद्र के वातावरण में मरम्मत का काम करना अपने आप में एक बहुत बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है.
ईरान ले सकता है बड़ा फैसला
मौजूदा हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि अगर यह संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर केवल युद्ध के मैदान तक ही सीमित नहीं रहेगा; बल्कि, इसका पूरी दुनिया के लोगों के डिजिटल जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.