Valentine Day 2026: कहीं आप सिचुएशनशिप में तो नहीं? टूटने से पहले संभाल लें रिश्ता, जानें 5 जरूरी मंत्र
Valentine Day Special: किसी भी रिश्ते में सिर्फ इसलिए बने रहना कि अब तक साथ हैं या लोग क्या कहेंगे, यह न तो सही है और न ही सेहतमंद. उसी तरह वैलेंटाइन डे जैसे किसी खास दिन पर दबाव में आकर प्यार का इजहार करना भी ठीक नहीं। प्यार कभी मजबूरी या दिखावे से नहीं चलता, वह समझ, सम्मान और सच्ची भावना से चलता है. आज के डिजिटल युग में रिश्तों को लेकर कई तरह के असमंजस होते हैं, प्यार है या नहीं इसे लेकर भी लोग दुविधा में रहते हैं. कुछ तो सिचुएशनशिप कहते हैं, यानी कि सिर्फ काम चलाऊ मोहब्बत. तो जानिए एक्सपर्ट द्वारा उन पांच तरीकों को, जिससे आप अपने रिश्ते के भविष्य को पहचान सकते हैं उसे मजबूत बना सकते हैं.
खुद को पहचानें
किसी भी रिश्ते को समझने से पहले खुद को समझना बहुत जरूरी है. जब तक हमें यह साफ नहीं होगा कि हम रिश्ता क्यों चाहते हैं, तब तक हम सही फैसला नहीं ले पाएंगे. पहले लोगों को लगता है कि उन्हें सिर्फ किसी का साथ चाहिए, लेकिन बाद में समझ आता है कि वह सिर्फ अपने अकेलेपन से भाग रहा था. लेकिन जब आप खुद को समझना शुरू करते हैं, तब मजबूत रिश्ता पहले खुद से बनता है, फिर किसी और से.
ईमानदारी
आजकल के रिश्तों में उलझन और अनिश्चितता आम बात है. भले ही Gen Z ने इन हालातों के लिए नए-नए नाम रख दिए हों, लेकिन सिर्फ नाम देने से समस्या खत्म नहीं होती. जरूरी यह है कि हम रिश्ते की इन अस्पष्ट स्थितियों को पहचानें और उनसे ईमानदारी से निपटें. अपनी भावनाओं को साफ शब्दों में कहें, खुलकर बातचीत करें और एक-दूसरे का सम्मान करें. यही साफपन, सच्चाई और समझ किसी भी रिश्ते को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने की असली नींव है. डॉ. देवंशी देसाई भी कहती हैं कि रिश्तों में ईमानदारी जरूरी है.
अपनी आवश्यकताओं को पहचानें
डॉ. देवंशी देसाई कहती हैं कि रिश्ते हमारी जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा हैं, पूरी पहचान नहीं. इसलिए यह समझना जरूरी है कि हम बिना किसी रिश्ते के भी कौन हैं और क्या चाहते हैं. आज सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया भर में कई लोग खुद को प्राथमिकता दे रहे हैं. वे जल्दीबाजी में रिश्ते बनाने के बजाय, गंभीर और सच्चे रिश्तों की तलाश कर रहे हैं. चाहे आप किसी भी लिंग के हों, सतही या दिखावे वाले रिश्तों से बचने के लिए अपनी जरूरतों को साफ समझना जरूरी है. अगर आप भरोसा, भावनात्मक समझ और लंबे समय तक साथ निभाने वाला रिश्ता चाहते हैं, तो शुरुआत में ही अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट कर दें.
वर्चुअल की दुनिया हमेशा रियल नहीं होती
आज के दौर में जब प्यार डेटिंग ऐप्स पर बाएं या दाएं स्वाइप करने तक सिमट गया है, तब यह जरूरी है कि हम सतही रिश्तों के बजाय वास्तविक रिश्तों को प्राथमिकता दें. मनोवैज्ञानिक का कहना है कि चाहे आप किसी से आमने-सामने मिल रहे हों या ऑनलाइन जुड़ रहे हों, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सामने वाले की दिलचस्पी भी आपमें सच्ची हो और आप भी उतनी ही ईमानदारी और इरादे से दिलचस्पी दिखा रहे हों. इसलिए अच्छा और लंबा रिश्ता चलाने के लिए आमने-सामने से मिलना जरूरी है.
मेंटल हेल्थ के बारे में बात करनी चाहिए
अपनी कमजोरियों को खुलकर व्यक्त करना आसान नहीं होता, लेकिन जिस रिश्ते में भावनात्मक सुरक्षा हो, वहां अपने आंतरिक विचारों को, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल है , खुलकर साझा करना कहीं अधिक संभव लगता है. अनसुलझे मुद्दों या बार-बार होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए पेशेवर सहायता लेना न केवल व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देता है, बल्कि रिश्ते को भी मजबूत बनाता है.