कहीं ये बीमारियां तो नहीं छीन रहीं आपकी आंखों की रोशनी? शुरुआती लक्षण जानकर बचा सकते हैं नजर
Vision Loss Symptoms: आंखें हमारे शरीर का बेहद जरूरी हिस्सा हैं. इनके बिना हम दुनिया की खूबसूरती, अपने अपनों के चेहरे और रोजमर्रा की छोटी-छोटी खुशियों को देख ही नहीं सकते. लेकिन आजकल लाइफस्टाइल, बढ़ती उम्र, डायबिटीज और दूसरी बीमारियों की वजह से नजर कमजोर होना आम होता जा रहा है. कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में समस्या गंभीर हो जाती है.भारत में बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी तरह की विजन प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में समय पर जांच और सही इलाज से अंधेपन को रोका जा सकता है. आइए जानते हैं विस्तार से.
मोतियाबिंद
मोतियाबिंद में आंख का लेंस धीरे-धीरे धुंधला हो जाता है. शुरुआत में हल्का धुंधलापन महसूस होता है, लेकिन समय के साथ चीजें साफ दिखाई देना बंद हो सकता है. तेज रोशनी चुभने लगती है, रात में गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है और कभी-कभी एक चीज दो दिख सकती है.अधिकतर मामलों में यह उम्र बढ़ने से होता है, लेकिन डायबिटीज, धूम्रपान और ज्यादा धूप में रहने से भी खतरा बढ़ जाता है. इसका सबसे असरदार इलाज सर्जरी है, जिसमें खराब लेंस को हटाकर नया लेंस लगाया जाता है.
ग्लूकोमा
ग्लूकोमा को 'साइलेंट चोर' भी कहा जाता है क्योंकि यह बिना ज्यादा लक्षण दिए आंखों की नस (ऑप्टिक नर्व) को नुकसान पहुंचाता है. आंख के अंदर का दबाव बढ़ने से धीरे-धीरे नजर कम होने लगती है. कई लोगों को शुरुआत में पता ही नहीं चलता.कभी-कभी आंखों में दर्द, सिरदर्द या रोशनी के चारों तरफ घेरा दिखना इसके संकेत हो सकते हैं. अगर समय पर इलाज न कराया जाए तो स्थायी अंधापन हो सकता है. दवाइयों, आई ड्रॉप्स, लेजर या सर्जरी से इसे कंट्रोल किया जा सकता है.
डायबिटिक रेटिनोपैथी
डायबिटीज सिर्फ शुगर की बीमारी नहीं है, यह आंखों पर भी असर डाल सकती है. जब ब्लड शुगर लंबे समय तक कंट्रोल में नहीं रहती, तो रेटिना की नसें कमजोर हो जाती हैं. इससे धुंधला दिखना, आंखों के सामने काले धब्बे या अचानक नजर कम होना जैसे लक्षण दिख सकते हैं.डायबिटीज के मरीजों के लिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी है. शुगर कंट्रोल रखना इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है.
चश्मे की जरूरत वाली समस्याएं भी बन सकती हैं परेशानी
कई बार नजर की समस्या सिर्फ चश्मे से ठीक हो जाती है, जैसे दूर या पास की चीज साफ न दिखना. इसे रिफ्रैक्टिव एरर कहा जाता है. लेकिन अगर लंबे समय तक इसे नजरअंदाज किया जाए तो आंखों पर तनाव बढ़ सकता है. सही नंबर का चश्मा या लेजर ट्रीटमेंट से यह समस्या ठीक की जा सकती है.
कॉर्निया और इंफेक्शन से जुड़ी दिक्कतें
आंख का सामने वाला पारदर्शी हिस्सा कॉर्निया कहलाता है. इसमें चोट, संक्रमण या किसी बीमारी की वजह से दिक्कत आ सकती है. आंख लाल होना, दर्द होना या अचानक नजर धुंधली होना इसके संकेत हो सकते हैं.इसी तरह बैक्टीरिया या वायरस से होने वाले इंफेक्शन भी नजर पर असर डाल सकते हैं. इसलिए आंखों में जलन या लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
कैसे करें बचाव?
आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए कुछ आसान आदतें बहुत मददगार साबित हो सकती हैं. धूप में जाते समय अच्छी क्वालिटी का सनग्लास पहनें. खाने में हरी सब्जियां, गाजर, पालक, फल और नट्स शामिल करें. अगर आपको डायबिटीज या ब्लड प्रेशर है तो उसे कंट्रोल में रखें.लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप देखने पर हर 20 मिनट में थोड़ी देर के लिए नजर स्क्रीन से हटाएं. धूम्रपान से बचें क्योंकि यह आंखों की कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है.
समय पर जांच है सबसे बड़ी सुरक्षा
कई आंखों की बीमारियां शुरुआत में दर्द या साफ लक्षण नहीं देतीं. इसलिए साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच कराना जरूरी है, खासकर अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा है या आप डायबिटीज के मरीज हैं.अगर अचानक नजर कम हो, तेज दर्द हो या रोशनी अजीब लगे तो इसे हल्के में न लें. तुरंत विशेषज्ञ से मिलें. सही समय पर इलाज आपकी आंखों की रोशनी बचा सकता है.