Uncontrolled Diabetes: अनियंत्रित डायबिटीज के लक्षण क्या है? शरीर पर असर, कितनी घटती है उम्र
Uncontrolled Diabetes: आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की लगभग 11.4% आबादी मतलब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं. अनियंत्रित डायबिटीज से होने वाली जटिलताएं धीरे-धीरे शरीर के कामकाज को खराब कर सकती हैं, जिससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. अब वो दिन चले गए जब डायबिटीज सिर्फ 45 साल से अधिक उम्र के वयस्कों को प्रभावित करती थी. अब यह बीमारी युवा वयस्कों और किशोरों में भी देखी जा रही है.
हेल्थलाइन के अनुसार, जब ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है, तो हमारे शरीर में कुछ खास लक्षण दिखाई देने लगते हैं. यदि इन लक्षणों की पहचान सही समय पर कर ली जाए, तो ब्लड शुगर के स्तर को आसानी से नियंत्रण में लाया जा सकता है. आइए, उन खास लक्षणों के बारे में जानें.
पानी की कमी
जब ब्लड शुगर का लेवल बढ़ता है, तो शरीर पेशाब के ज़रिए ज़्यादा ग्लूकोज़ को बाहर निकालने की कोशिश करता है. इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसके कारण बार-बार प्यास लगती है.
बार-बार पेशाब आना
जब ब्लड शुगर का लेवल 180 mg/dL से ज़्यादा हो जाता है, तो किडनी पेशाब के जरिए ज्यादा शुगर को बाहर निकालने का काम करती है. इससे दिन और रात, दोनों समय पेशाब करने की इच्छा बढ़ जाती है.
भूख बढ़ना
जब शरीर ग्लूकोज को सोख नहीं पाता चाहे इंसुलिन की कमी के कारण हो या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण तो दिमाग खाने की जरूरत का संकेत देता है. इसका नतीजा लगातार भूख लगना होता है.
वजन कम होना
जब शरीर ग्लूकोज़ से एनर्जी नहीं ले पाता, तो वह एनर्जी बनाने के लिए फैट और मांसपेशियों के ऊतकों को तोड़ना शुरू कर देता है. इससे तेजी से वजन कम होता है.
कमजोरी और थकान
ग्लूकोज शरीर की एनर्जी का मुख्य स्रोत है. जब यह कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता, तो शरीर में एनर्जी की भारी कमी हो जाती है.
नजर कमजोर होना
जब ब्लड शुगर का लेवल ज्यादा होता है, तो आंखों के लेंस से पानी बाहर निकल जाता है, जिससे उनका आकार बदल जाता है. इसका नतीजा धुंधली या बिगड़ी हुई नजर के रूप में सामने आता है.
घाव धीरे भरना
लंबे समय तक ब्लड शुगर का लेवल ज्यादा रहने से शरीर का सर्कुलेटरी सिस्टम और इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है. इसके परिणामस्वरूप, घाव धीरे भरते हैं, और शरीर में इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है.
हाथों और पैरों में सुन्नपन
डायबिटिक न्यूरोपैथी तब होती है जब लंबे समय तक ब्लड शुगर का लेवल ज्यादा रहने से शरीर की नसें खराब हो जाती हैं. इसकी शुरुआत आमतौर पर पैरों या हाथों की उंगलियों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन से होती है.