यह जन्मजात बीमारी बेहद गंभीर! जन्म के बाद आंख न खोले बच्चा तो जांच कराने में ही भलाई, जानिए लक्षण और उपचार
Coloboma Eye Disease: आंखें किसी भी इंसान के शरीर की सबसे जरूरी और नाजुक अंगों में से एक हैं. इनके बिना दुनिया की कल्पना मुश्किल है. क्योंकि, यही तो हैं जो हमें दुनिया की खूबसूरती का दीदार कराती हैं. इसलिए इनकी देखभाल भी अच्छे से करने की जरूरत है. क्योंकि, कई बार आंखों की गंभीर बीमारी से रोशनी तक जा सकती हैं. ऐसी ही एक बीमारी का नाम है कोलोबोमा. इसे नेत्रविदर भी कहा जाता है. बता दें कि, कोलोबोमा एक जन्मजात बीमारी है. इस बीमारी गंभीर इसलिए भी, क्योंकि शुरुआत में इसकी कम ही जानकारी हो पाती है.
बच्चे में जन्मजात होने वाली बीमारी कोलोबोमा
डॉक्टर की मानें तो, कोलोबोमा बच्चों में होने वाली एक जन्मजात बीमारी है. यह बीमारी तब होती है जब आंख का ऊतक पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है. यानी आंख में ऊतक का कुछ भाग नहीं बन पाता है. यह दिक्कत एक या दोनों आंखों को प्रभावित कर सकती है. अब सवाल है कि आखिर कोलोबोमा क्या है? क्यों हो सकती यह बीमारी? कोलोबोमा के लक्षण और उपचार क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. आलोक रंजन-
क्या है कोलोबोमा?
डॉ. आलोक रंजन बताते हैं कि, कोलोबोमा एक आंखों से जुड़ी बीमारी है. इस बीमारी को बच्चे साथ लेकर पैदा होते हैं. यह बीमारी तब होती है जब असामान्य या परिवर्तित जीन के कारण गर्भावस्था के दौरान बच्चे की आंख बनाने वाले ऊतक का हिस्सा गायब हो जाता है. यह एक या दोनों आंखों को प्रभावित कर सकता है. यह स्थिति आंखों के विकास को प्रभावित कर सकती है.
कोलोबोमा आंख में किस जगह होता है?
कोलोबोमा आंख के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे की आइरिस (आंख का रंगीन हिस्सा), युविआ (आंख की परत जिसमें परितारिका होती है), लेंस (आंख का स्पष्ट आंतरिक भाग जो आंख को फोकस करने में मदद करता है), रेटिना (आंख के पिछला हिस्सा), मैक्युला (केंद्रीय दृष्टि के लिए आवश्यक रेटिना का हिस्सा), ऑप्टिक तंत्रिका (तंत्रिका जो आंख को मस्तिष्क से जोड़ती है) और कुछ रेयर केस में कोलोबोमा पलकों को भी प्रभावित कर सकता है.
कोलोबोमा है या नहीं, कैसे जानें?
डॉक्टर कहते हैं कि, कोलोबोमा से पीड़ित कुछ बच्चों में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं. फिर, दृष्टि हानि या अंधापन, कम दृष्टि, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता उनको खुद ही बताना पड़ता है. वहीं, कुछ कोलोबोमा पीड़ितों के लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे, आईरिस कोलोबोमा पुतली गोल न होकर लम्बी होना. प्रकाश पड़ने पर आमतौर पर पुतली छोटी-बड़ी होती है परन्तु आईरिस कोलोबोमा में ऐसा नहीं होता है.
कोलोबोमा के लक्षण क्या है?
कोलोबोमा के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आंख का कौन सा हिस्सा प्रभावित है. कुछ मामलों में, कोलोबोमा दृष्टि को प्रभावित नहीं करता है, जबकि अन्य मामलों में, यह गंभीर दृष्टि हानि या अंधापन का कारण बन सकता है. हालांकि, सामान्य लक्षणों में आंख या पलक का असामान्य दिखना, धुंधली दृष्टि, अंधे धब्बे, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता आदि हो सकते हैं.
नेत्रविदर का उपचार क्या है?
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, कोलोबोमा का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि यह कितना गंभीर है और यह दृष्टि को कैसे प्रभावित करता है. कुछ मामलों में उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, जबकि अन्य मामलों में, चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है.