मायोपिया क्या है, क्यों बच्चों की नजर कमजोर हो रही है? रिसर्च ने किए चौंकाने वाले खुलासे
मायोपिया क्या है?
मायोपिया एक ऐसी कंडीशन है जिसमें व्यक्ति पास की चीज़ें साफ़ देखता है, लेकिन दूर की चीज़ें धुंधली दिखती हैं. यह प्रॉब्लम आमतौर पर बचपन और टीनएज में शुरू होती है. इसे चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस या लेजर सर्जरी से ठीक किया जा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि यह इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रही है?
मायोपिया पर सीनियर रिसर्चर अलोंसो ने क्या कहा?
सीनियर रिसर्चर जोस-मैनुअल अलोंसो के अनुसार, मायोपिया का एक बड़ा कारण रेटिना तक कम रोशनी पहुंचना हो सकता है. जब हम बाहर तेज़ धूप में होते हैं, तो पुतली आंख को बचाने के लिए सिकुड़ जाती है, फिर भी रेटिना तक काफ़ी रोशनी पहुंचने देती है. हालांकि, जब हम ज़्यादा देर तक घर के अंदर कम रोशनी में, मोबाइल फ़ोन, टैबलेट या किताब को ध्यान से देखते हुए बिताते हैं, तो पुतली दो वजहों से सिकुड़ जाती है पहला, पास से फ़ोकस करने के लिए और दूसरा कम रोशनी के बावजूद फ़ोकस को तेज़ करने के लिए. इस स्थिति में, रेटिना तक कम रोशनी पहुँचती है. इससे आँखों की ग्रोथ पर लंबे समय तक बुरा असर पड़ सकता है.
मायोपिया पर नई थ्योरी क्या बताती है?
रिसर्चर्स का मानना है कि अगर रेटिना को काफ़ी लाइट स्टिम्युलेशन नहीं मिलता है, तो आंख का न्यूरल सिग्नलिंग सिस्टम कमज़ोर हो सकता है. इससे आंख की लंबाई बढ़ सकती है, जो मायोपिया का एक बड़ा कारण है.
स्टडी में यह भी पाया गया कि:
नेगेटिव (माइनस) लेंस पुतली को और सिकोड़ सकते हैं.
यह असर कम दूरी से ज़्यादा देर तक देखने से और बढ़ जाता है.
यह समस्या पहले से ही मायोपिक आंखों में और खराब हो सकती है.
मायोपिया में पलकें झपकाने से जुड़ा प्यूपिलरी रिस्पॉन्स भी कम पाया गया.
मायोपिया में बाहर समय बिताना क्यों फायदेमंद है?
यह पहले ही साबित हो चुका है कि जो बच्चे धूप में बाहर ज़्यादा समय बिताते हैं, उनमें मायोपिया का खतरा कम होता है. इस नई स्टडी के अनुसार, तेज़ नेचुरल लाइट से न केवल फोकस करने की वजह से, बल्कि लाइट की वजह से भी प्यूपिल सिकुड़ जाती है. इससे रेटिना को काफ़ी रोशनी मिलती है और आँखों का बैलेंस बना रहता है.
क्या है मायोपिया का इलाज?
मायोपिया के इलाज के लिए एट्रोपिन आई ड्रॉप्स, मल्टीफोकल लेंस और खास ऑप्टिकल डिज़ाइन का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, साइंटिस्ट अभी तक यह नहीं समझ पाए हैं कि ये अलग-अलग तरीके कैसे काम करते हैं. एक नई थ्योरी बताती है कि ये सभी तरीके प्यूपिल सिकुड़ने और फोकस करने के स्ट्रेस को कम करते हैं, जिससे लाइट रेटिना तक बेहतर तरीके से पहुँच पाती है. हालाँकि साइंटिस्ट कहते हैं कि यह कोई पक्का नतीजा नहीं है, लेकिन यह एक मज़बूत और टेस्ट करने लायक हाइपोथिसिस है.
भारत के लिए मायोपिया का क्या मतलब है?
भारत में, खासकर शहरी बच्चों में स्क्रीन टाइम तेज़ी से बढ़ा है. ऑनलाइन लर्निंग, मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया ने बच्चों को घंटों घर के अंदर बिताने पर मजबूर कर दिया है. अगर यह नई थ्योरी सही है, तो हमें न सिर्फ़ स्क्रीन टाइम कम करने पर ध्यान देना होगा, बल्कि घर के अंदर की लाइटिंग को भी बेहतर बनाना होगा.
मायोपिया में हम क्या कर सकते हैं?
पढ़ाई करते समय या अपना मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करते समय कमरे में अच्छी रोशनी रखें.
हर दिन कम से कम 1-2 घंटे बाहर नैचुरल धूप में बिताएं.
लंबे समय तक पास से देखने के बीच ब्रेक लें (20-20-20 रूल फॉलो करें).
अगर ज़रूरी हो, तो एट्रोपिन ड्रॉप्स या स्पेशल लेंस के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें.
डिस्क्लेमर
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