चेहरे का नूर छीन लेती है यह बीमारी! कम उम्र में ही झलकने लगता बुढ़ापा, डॉक्टर से जानें कारण और बचाव
Oxidative Stress: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, टेंशन या स्ट्रेस का होना आम हो गया है. हालांकि, जीवन में कभी-कभार तनाव तो ठीक है. लेकिन, छोटी-छोटी बात पर टेंशन लेंगे तो यकीनन आप सेहत से खिलवाड़ करेंगे. इसकी अनदेखी से कई बड़ी परेशानियां भी बन सकती हैं. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस इसकी एक उपज है. बता दें कि, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस असंतुलित जीवन शैली, अनहेल्दी फैट और प्रदूषण के कारण होती है. एक्सपर्ट की मानें तो अगर वक्त रहते कंट्रोल नहीं किया गया है तो आप वक्त से पहले बीमार, बूढ़े और कमजोर हो जाएंगे. ऐसे में सवाल है कि आखिर, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस क्या है, जो कम उम्र में ही बना देती बूढ़ा? ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कैसे कम करें? इससे किन परेशानियों का बढ़ता है जोखिम? इस बारे में India News को बता रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार-
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस क्या है?
एक्सपर्ट के मुताबिक, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का मतलब है, कि शरीर में फ्री रेडिकल्स की मात्रा का बढ़ जाना. भोजन करने के बाद मेटाबॉलिक प्रोसेस के दौरान हमारी बॉडी एक सेल्स फ्री रेडिकल्स बनाते हैं. हालांकि, सेल्स एंटीऑक्सीडेंट भी पैदा करती हैं, जो इन फ्री रेडिकल्स को हटाने का काम करते हैं. यानी हमारा शरीर एंटीऑक्सीडेंट और फ्री रेडिकल्स के बीच बैलेंस बनाए रखने का काम करता है, लेकिन जब किसी कारण से वो बैलेंस असंतुलित हो जाता है तो इस कंडीशन को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कहते हैं.
इस स्ट्रेस का स्किन पर इफेक्ट?
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की स्थिति में शरीर में फ्री रेडिकल्स की मात्रा बढ़ जाती है. ये शरीर में रक्त और अन्य लिक्विड के साथ मिलकर बहते रहते हैं. ये हमारे शरीर की अंदरूनी कोशिकाओं को हानि पहुंचाते हैं, जिसका असर त्वचा के बाहरी हिस्से पर भी दिखता है और त्वचा थकी हुई, सूजन युक्त या अनफिनिश्ड दिखती है. दिखने लगती है. झुर्रियां और झाइयां आने की प्रक्रिया तेज हो जाती है.
क्यों होता है ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस?
ऐसे कई फैक्टर हैं, जिनके कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. जैसे – अनियमित लाइफ स्टाइल, अनहेल्दी डाइट, अल्कोहल का सेवन, व्यायाम की कमी, प्रदूषण के कारण भी इसमें वृद्धि हुई है. आपके शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया भी अस्थायी रूप से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को ट्रिगर कर सकती है.
इन बीमारियों का बढ़ता है जोखिम
ये फ्री रेडिकल्स शरीर को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं. इसके लक्षण आपको बॉडी में हर जगह दिखाई देते हैं. इसकी वजह से दिल से जुड़ी बीमारियों से लेकर हाई ब्लड प्रेशर से अस्थमा और सीओपीडी (CoPD) सहित फेफड़े, जोड़ों में गठिया, शरीर में दर्द, सूजन से जुड़ी तकलीफें और बीमारियां हो सकती हैं.
ऐसे कम करें ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने के लिए सबसे पहले धूम्रपान और शराब को छोड़ें. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर स्वस्थ आखर अपनी डाइट में शामिल करें और नियमित व्यायाम करें. अपनी लाइफस्टाइल में ये हल्के फुल्के बदलाव करे.