जब रीयल लाइफ गैंगस्टर का किरदार निभाकर रो पड़े अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल; जानें ‘लियारी’ के उस ‘रहमान डकैत’ की खौफनाक दास्तान
आदित्य धर की हालिया फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है, लेकिन इस फिल्म के पीछे की हकीकत बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली है. फिल्म में अक्षय खन्ना ने पाकिस्तान के कराची स्थित लियारी इलाके के कुख्यात गैंगस्टर ‘रहमान डकैत’ का किरदार निभाया है. खबर है कि इस किरदार की क्रूरता और उसके द्वारा किए गए असली अपराधों को पर्दे पर उतारते समय अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल जैसे मंझे हुए कलाकार भी अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पाए और सेट पर फूट-फूट कर रो पड़े.
कौन था रहमान डकैत? क्रूरता की सारी हदें पार
अक्षय खन्ना ने फिल्म में 'सरदार अब्दुल रहमान बलूच' उर्फ 'रहमान डकैत' का किरदार निभाया है. वह पाकिस्तान के सबसे खतरनाक अपराधियों में से एक था. रहमान का जन्म 1975 में लियारी में हुआ था, जो अपराध और गरीबी का केंद्र माना जाता था. उसकी क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने महज 13 साल की उम्र में अपना पहला अपराध किया और 19 साल की उम्र में अपनी ही मां की हत्या कर दी थी.
अपनी ही मां का कातिल: एक खौफनाक हकीकत
फिल्म की रिसर्च के दौरान जब कलाकारों को पता चला कि रहमान डकैत ने अपनी मां का गला घोंटकर उन्हें पंखे से लटका दिया था ताकि वह आत्महत्या लगे, तो वे सन्न रह गए. रहमान ने पुलिस को बताया था कि उसकी मां पुलिस की मुखबिर (informant) बन गई थी, इसलिए उसने उन्हें मार डाला. इस तरह के अमानवीय कृत्यों को पर्दे पर निभाना अक्षय खन्ना के लिए मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला और भावुक कर देने वाला अनुभव रहा.
कटे हुए सिरों से फुटबॉल खेलने का वह वहशियाना मंजर
लियारी अपनी फुटबॉल संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन रहमान डकैत ने इसे मौत के खेल में बदल दिया था. रिपोर्ट्स के अनुसार, रहमान और उसके साथी अपने दुश्मनों का सिर काटकर उससे फुटबॉल खेलते थे. फिल्म में इस तरह के डार्क और हिंसक पहलुओं को शूट करते समय अर्जुन रामपाल और अक्षय खन्ना काफी विचलित हो गए थे. कलाकारों के लिए यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि कोई इंसान इतना क्रूर कैसे हो सकता है.
लियारी का 'वाइल्ड वेस्ट' और रहमान का साम्राज्य
कराची का लियारी इलाका एक समय 'वाइल्ड वेस्ट' कहलाता था, जहां कानून नहीं बल्कि रहमान डकैत का सिक्का चलता था. उसने 'पीपल्स अमन कमेटी' बनाई और राजनीति में भी अपनी पैठ जमाई. उसके पास अत्याधुनिक हथियारों की फौज थी और वह नशे के कारोबार से लेकर अपहरण तक, हर काले धंधे का बेताज बादशाह था. फिल्म में इस साम्राज्य को ढहते हुए दिखाया गया है, जिसने रीयल लाइफ में हजारों जिंदगियां निगल ली थी.
शूटिंग के दौरान क्यों रो पड़े अक्षय और अर्जुन?
सेट से जुड़ी खबरों के मुताबिक, जब अक्षय खन्ना रहमान डकैत के 'डार्क' सीन्स शूट कर रहे थे, तो वे उस किरदार की नफरत और वहशीपन के बोझ से दब गए थे. वहीं अर्जुन रामपाल, जो फिल्म में एक अहम भूमिका में है, इन असली घटनाओं की गहराई जानकर भावुक हो गए. कलाकारों का कहना था कि एक इंसान की इतनी नफरत और हिंसा को जीना आत्मा को झकझोर देता है. यही कारण था कि कई बार पैकअप के बाद वे खुद को संभाल नहीं पाते थे और उनकी आंखों से आंसू निकल जाते थे.
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट चौधरी असलम और रहमान का अंत
रहमान डकैत का अंत 2009 में एक पुलिस एनकाउंटर में हुआ. कराची के मशहूर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट चौधरी असलम ने उसे मार गिराया था. पुलिस के अनुसार, रहमान 80 से ज्यादा गंभीर मामलों में वांछित था. फिल्म 'धुरंधर' में इस एनकाउंटर और उससे पहले की जासूसी (Spying) को काफी रोमांचक तरीके से दिखाया गया है, जिसे दर्शक खूब पसंद कर रहे है.
फिल्म 'धुरंधर' का बॉक्स ऑफिस पर तूफान
रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल जैसे सितारों से सजी 'धुरंधर' ने कुछ ही दिनों में 150 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर लिया है. फिल्म की सफलता का श्रेय अक्षय खन्ना के उस 'शांत लेकिन डरावने' अभिनय को भी जाता है, जिसे निभाने के लिए उन्होंने अपनी पूरी मानसिक ऊर्जा लगा दी.
पर्दे के पीछे का कड़वा सच
फिल्म 'धुरंधर' हमें मनोरंजन तो देती है, लेकिन यह उन कड़वे सच से भी रूबरू कराती है जो समाज के अंधेरे कोनों में दबे हुए है. अक्षय और अर्जुन का भावुक होना यह दर्शाता है कि एक कलाकार केवल एक्टिंग नहीं करता, बल्कि वह उन जख्मों को भी महसूस करता है जो इतिहास में दर्ज हो चुके है. रहमान डकैत की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि अपराध का रास्ता चाहे कितना भी चमक-धमक वाला क्यों न हो, उसका अंत हमेशा भयावह ही होता है.