Whiskey War: जंग है या मजाक! गोला-बारूद नहीं, इन दो देशों ने सालों तक व्हिस्की से लड़ा युद्ध
Whiskey War: ईरान से लेकर इजराइल अमेरिका तक हर तरफ जंग हो रही है. लगातार ब्लास्ट की खबरे जानने के बाद लोग दहशत में हैं. कब कहां क्या हो जाए कुछ नहीं पता. इस समय युद्ध की खबरें सुर्ख़ियों में हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे युद्ध के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे जानने के बाद आपको ये जंग नहीं एक मजाक लगेगा. ये एक ऐसा युद्ध था जो बिना किसी मिसाइल के इस्तेमाल के और बिना किसी सैनिक की जान गंवाए लड़ा गया यह संघर्ष पूरे 38 सालों तक चला. चलिए जान लेते हैं ये युद्ध कहाँ और कैसे लड़ा गया.
हथियार या बंदूक नहीं बल्कि...
बता दें कि इस युद्ध के हथियार बंदूकें और गोला-बारूद नहीं, बल्कि व्हिस्की की बोतलें थीं. जिस तरह से कनाडा और डेनमार्क ने 'हंस आइलैंड' पर अपनी संप्रभुता का दावा किया, वो दुनिया की सबसे अनोखी और मज़ेदार कहानियों में से एक है.
द्वीप को लेकर बवाल
बता दें कि कनाडा और ग्रीनलैंड के बीच बर्फीले पानी में स्थित एक छोटा सा द्वीप है, जिसे 'हंस आइलैंड' के नाम से जाना जाता है. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, दोनों देशों के पास इस द्वीप पर दावा करने का कानूनी आधार था. शुरुआत में, जब द्वीप को लेकर तनाव बढ़ा, तो 1973 में कनाडा और डेनमार्क के बीच एक औपचारिक संधि पर हस्ताक्षर किए गए.
कनाडा ने किया जंग का आगाज
इस अनोखे युद्ध की औपचारिक शुरुआत 1984 में हुई. कनाडाई सैनिकों ने हंस आइलैंड का दौरा किया और अपना राष्ट्रीय ध्वज फहराया; लेकिन, वो न केवल अपना ध्वज, बल्कि कनाडाई व्हिस्की की एक बोतल भी वहीं छोड़ गए. यह एक तरह का संदेश था, जो यह दावा करता था कि यह क्षेत्र कनाडा का है.
डेनमार्क ने कैसे दिया जवाब
कनाडा की इस एक हरकत ने डेनमार्क को जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया. जिसके बाद ये 'व्हिस्की युद्ध', शुरू हुआ. एक ऐसी गाथा जो दशकों तक चली. डेनमार्क ने कनाडा की व्हिस्की-भरी चुनौती का जवाब बेहद दिलचस्प तरीके से दिया.
डेनमार्क की रखी शराब
डेनमार्क के 'ग्रीनलैंड मामलों के मंत्री' ने व्यक्तिगत रूप से इस द्वीप की यात्रा की. वहाँ पहुँचने पर, उन्होंने कनाडाई ध्वज को हटा दिया और उसकी जगह डेनमार्क का ध्वज फहरा दिया. कनाडाई व्हिस्की के बदले, उन्होंने 'डेनिश श्नैप्स' (डेनमार्क की मशहूर शराब) की एक बोतल छोड़ दी.
ऐसे छोड़ा नोट
उन्होंने एक नोट भी छोड़ा, जिस पर लिखा था: "डेनिश द्वीप पर आपका स्वागत है." यह सिलसिला कई सालों तक चलता रहा; जब भी किसी एक देश का कोई प्रतिनिधिमंडल उस जगह पर जाता, तो वे दूसरे देश की शराब पी लेते और अपनी देश की एक बोतल वहाँ छोड़ आते.