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कौन हैं रघु उर्फ राघवेंद्र द्विवेदी? भूखे रहकर श्मशान में काटी रातें, आज टीम इंडिया की है रीढ़, सचिन से लेकर कोहली तक फैन!

इंडिया ने हाल ही में टी20 विश्व कप अपने नाम कर लिया है. इंडिया टीम में एक से बढ़कर एक बैट्समैन और बॉलर हैं. लेकिन, एक बॉलर ऐसा भी है जो टीम में होकर भी टीम में नहीं है. इसकी चर्चा सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक सभी करते हैं. हम बात कर रहे हैं नेट बॉलर रघु की. जी हां, इसके सामने जसप्रीत बुमराह भी नतमस्तक होकर सम्मान देते हैं. चलिए जानते हैं कौन हैं रघु द्विवेदी?

Last Updated: March 11, 2026 | 2:20 PM IST
Who is Raghavendra Dwivedi - Photo Gallery
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कौन हैं राघवेंद्र द्विवेदी?

जब इंडिया ने 2026 T20 वर्ल्ड कप जीता, तो एक आदमी माथे पर कुमकुम (सिंदूर का टीका) लगाए चुपचाप मैदान पर खड़ा था. यह आदमी कर्नाटक के रहने वाले राघवेंद्र द्विवेदी थे. उनकी जिंदगी संघर्ष, जुनून और टीम इंडिया की सफलता में उनके अहम रोल की मिसाल है. टीम इंडिया के लिए राघवेंद्र का डेडिकेशन, खिलाड़ियों के लिए उनकी बिना स्वार्थ की मेहनत और किसी भी पल मदद करने की उनकी इच्छा बुमराह जैसे लेजेंड्स को भी उनके सामने झुका देती है.

Raghu left home with Rs 21 - Photo Gallery
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21 रुपए घर से लेकर निकले थे रघु

करीब 24 साल पहले उत्तर कन्नड़ जिले के कुमटा शहर से एक छोटा लड़का सिर्फ़ 21 रुपये लेकर निकला था. उसका सपना क्रिकेटर बनना था. लेकिन हाथ की एक गंभीर चोट ने उस सपने को तोड़ दिया. फिर भी उसने हार नहीं मानी और क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का पक्का इरादा कर लिया.

Nights spent at the crematorium - Photo Gallery
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श्मशान घाट पर बिताई रातें

राघवेंद्र के पिता क्रिकेट के लिए उसके प्यार के सख्त खिलाफ थे. हालात ने राघवेंद्र को अपना परिवार, आराम और बाकी सभी ऐशो-आराम छोड़कर क्रिकेट चुनने पर मजबूर कर दिया. वह हुबली पहुंचा, जहां उसने बस स्टैंड, मंदिरों और श्मशान घाटों पर रातें बिताईं. करीब साढ़े चार साल तक उसने एक खाली पड़े श्मशान घाट को अपना घर बना लिया. ठंडी रातों में एक पुराना क्रिकेट मैट उसके कंबल का काम करता था.

Troubles took a new turn - Photo Gallery
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मुश्किलों ने एक नया मोड़ लिया

इन सभी मुश्किलों के बावजूद क्रिकेट के लिए उसका जुनून कम नहीं हुआ. उसने हुबली में प्रैक्टिस कर रहे क्रिकेटरों को नेट्स में थ्रोडाउन देना शुरू कर दिया. उसकी कड़ी मेहनत और लगन ने एक दोस्त को इम्प्रेस किया, जिसने उसे बेंगलुरु भेज दिया. बेंगलुरु में उन्हें कर्नाटक इंस्टिट्यूट ऑफ़ क्रिकेट में एक जगह मिली, जहां वे खिलाड़ियों को थ्रोडाउन देते थे और बॉलिंग मशीन को मैनेज करते थे. यहीं से उनकी असली पहचान सामने आई.

Raghu got a chance - Photo Gallery
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रघु को मिला चांस

कर्नाटक के पूर्व विकेटकीपर और अंडर-19 सिलेक्शन कमिटी के मौजूदा हेड तिलक नायडू ने राघवेंद्र की कड़ी मेहनत को पहचाना और उन्हें जवागल श्रीनाथ से मिलवाया. श्रीनाथ भी उनके डेडिकेशन से बहुत इम्प्रेस हुए और उन्हें कर्नाटक रणजी टीम में शामिल होने का मौका दिया गया. यहीं से उनकी जिंदगी सच में बदलने लगी.

Raghu got national recognition - Photo Gallery
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रघु को मिली नेशनल पहचान

फिर राघवेंद्र ने चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में काम करना शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने कई सालों तक बिना सैलरी के काम किया. कभी-कभी तो भूखे भी रहे लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. आखिरकार उन्होंने BCCI का लेवल 1 कोचिंग कोर्स पूरा किया और भारतीय खिलाड़ियों के बीच पॉपुलर हो गए. उनकी असली काबिलियत को सचिन तेंदुलकर ने पहचाना, जिनकी सिफारिश पर राघवेंद्र को 2011 में इंडियन क्रिकेट टीम के साथ ट्रेनिंग असिस्टेंट के तौर पर शामिल किया गया.

Raghu Bhai is the backbone of Team India - Photo Gallery
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टीम इंडिया की रीढ़ - 'रघु भाई'

पिछले 13 सालों से राघवेंद्र, जिन्हें प्यार से "रघु" कहा जाता है, इंडियन टीम का एक अहम हिस्सा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के तौर पर उन्होंने नेट्स में 1 मिलियन से ज़्यादा गेंदें फेंकी हैं. उनकी स्पीड और एक्यूरेसी इतनी शानदार है कि वे 150 km/h तक की स्पीड से बॉलिंग कर सकते हैं. विराट कोहली ने एक बार कहा था कि नेट्स में रघु की 150 km/h की स्पीड वाली गेंदों का सामना करने के बाद मैच में सबसे तेज गेंदबाज भी मीडियम पेसर जैसा महसूस करते हैं.

Playing a key role behind the scenes - Photo Gallery
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पर्दे के पीछे निभा रहे अहम रोल

राघवेंद्र का योगदान अक्सर पर्दे के पीछे छिपा रहता है, लेकिन इंडियन क्रिकेट टीम की तैयारी और सफलता में उनकी मौजूदगी का अहम रोल होता है. उन्हें दुनिया के सबसे अच्छे थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट में से एक माना जाता है. राघवेंद्र की कहानी इस बात का प्रतीक है कि हर बड़ी जीत के पीछे ऐसे लोग होते हैं जिनका योगदान भले ही दिखाई न दे लेकिन बहुत कीमती होता है. शायद रघु नेट्स में वैसा ही खेल दिखाते हैं जैसा बुमराह मैदान पर दिखाते हैं. इस फ़ोटो की खूबसूरती यह है कि यह भारतीय क्रिकेट के कल्चर और इसके समर्पित लेजेंड्स के प्रति सम्मान दिखाती है.

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