Who Owns Galgotias University, किताबों की दुकान से करोड़ों का साम्राज्य, ‘चीनी रोबोट’ विवाद ने हिलाया यूनिवर्सिटी का नाम
गलगोटिया विश्वविद्यालय का मालिक कौन?: उत्तर प्रदेश के नोएडा के गलगोटिया विश्वविद्यालय इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहा है. जहां, गलगोटिया विश्वविद्यालय में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया जब प्रदर्शित किए गए एक रोबोटिक कुत्ते को कथित तौर पर विश्वविद्यालय का स्वदेशी आविष्कार बताया गया. तो वहीं, दूसरी तरफ कार्यक्रम के दौरान यह रोबोट आकर्षण का मुख्य केंद्र था, लेकिन बाद में इसकी असलियत सामने आने पर संस्थान की काफी बदनामी देखने को मिली. तकनीक के जानकारों ने दावा किया कि यह रोबोटिक कुत्ता पूरी तरह से चीन में निर्मित है.
आविष्कार का दावा
विश्वविद्यालय ने एआई समिट जैसे बड़े मंच पर एक रोबोटिक कुत्ते को प्रदर्शित करने का काम किया. जहां, मौजूद प्रतिनिधियों और मीडिया को यह आभास कराया गया कि यह उनके संस्थान के अंदर तैयार किया गया एक तकनीकी चमत्कार है.
सोशल मीडिया का पर्दाफाश
जैसे ही इस इवेंट की तस्वीरें एक्स और लिंक्डइन पर आईं, टेक एक्सपर्ट्स ने तुरंत इसकी बनावट को पहचान लिया है. जहां, उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यह कोई नया शोध नहीं, बल्कि पहले से बाजार में मौजूद एक उत्पाद है.
चीनी कंपनी से संबंध
लेकिन, जांच में पाया गया कि यह रोबोट चीन की विख्यात टेक कंपनी 'यूनिट्री रोबोटिक्स' का 'Go2' मॉडल है यह मॉडल दुनिया भर में व्यावसायिक रूप से बिक्री के लिए उपलब्ध है.
इंटीग्रिटी पर उठे सवाल
तो वहीं, विवाद की मुख्य वजह से विदेशी तकनीक का इस्तेमाल नहीं था, बल्कि उसे 'अपना आविष्कार' बताना था. लेकिन, विशेषज्ञों ने कहा कि किसी और की बनाई मशीन को खुद का शोध बताना अकादमिक ईमानदारी (Academic Integrity) के खिलाफ है.
नेटिज़न्स की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी को जमकर ट्रोल किया जा रहा है. जहां, लोगों ने मूल चीनी वेबसाइट के स्क्रीनशॉट और यूनिवर्सिटी के दावों को एक साथ रखकर यह दिखाया कि कैसे सिर्फ लोगों या मामूली बदलाव करके उसे नया बताया जा रहा है.
'मेक इन इंडिया' और वास्तविकता
भारत में इस समय स्वदेशी नवाचार पर खास तौर से जोर दिया जा रहा है. ऐसे में एक चीनी रोबोट को भारतीय संस्थान का आविष्कार बताना सरकार के 'मेक इन इंडिया' मिशन की छवि को धूमिल करने वाला माना गया.
चोरी के रूप में देखा जा रहा है
शिक्षा जगत में इसे 'साहित्यिक चोरी' या तकनीकी चोरी के रूप में देखा जा रहा है. तो वहीं, विशेषज्ञों ने कहा कि संस्थानों को यह साफ करना चाहिए कि उन्होंने तकनीक खरीदी है या खुद विकसित की है.
गलगोटिया विश्वविद्यालय पर पड़ा संकट
इस घटना से गलगोटिया विश्वविद्यालय की साख पर गहरा असर पड़ा है. लोग अब संस्थान के अन्य शोध कार्यों और भविष्य के दावों को भी शक की निगाह से देख रहे हैं.
आखिर कौन है गलगोटिया विश्वविद्यालय का मालिक?
गलगोटिया समूह की जड़ें 1930 की किताबों की दुकान से जुड़ी हैं. जहां, साल 1998 में स्थापित शकुंतला सोसाइटी के अधीन यह समूह प्रकाशन से विकसित होकर आज प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और कई पेशेवर कॉलेज संचालित करता है.