Women Health: PCOS का इंटिमेट लाइफ पर असर, किन महिलाओं को होता है ज्यादा खतरा, लक्षण और बचाव के उपाय
PCOS Awareness: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) न केवल एक महिला के शारीरिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता पर असर डालता है, बल्कि उसकी यौन जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालता है. असल में, शरीर के अंदर होने वाले हार्मोनल असंतुलन जैसे कि एंड्रोजन की अधिकता और इंसुलिन प्रतिरोध अक्सर यौन इच्छा में कमी का कारण बनते हैं. इसके अलावा, अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना और शरीर पर अनचाहे बालों जैसी समस्याएं अक्सर महिलाओं में अपनी शारीरिक बनावट को लेकर काफी मानसिक तनाव पैदा करती हैं, जिससे उनके यौन स्वास्थ्य और अंतरंग संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इस आर्टिकल में ओनली माय हेल्थ के आधार पर विभिन्न वैज्ञानिक तथ्यों का हवाला दिया गया है, जिनकी पुष्टि ‘मम्माज ब्लेसिंग IVF एंड बर्थिंग पैराडाइज’ (वृंदावन) की मेडिकल डायरेक्टर और आवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता ने की है.
PCOS का गहरा असर
2020 में Sexual Medicine Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, PCOS का यौन जीवन पर काफी गहरा असर पड़ता है. इस अध्ययन से पता चला कि PCOS से पीड़ित 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को यौन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
यौन इच्छा में कमी
PCOS से पीड़ित महिलाओं में अक्सर यौन इच्छा में कमी देखी जाती है. असल में, ऐसी महिलाओं में लगातार मूड स्विंग और हेल्थ से जुड़ी समस्याएं होती है. इसके अलावा, यह हार्मोनल असंतुलन का एक मुख्य कारण भी है. नतीजतन, ऐसी महिलाओं की यौन संबंधों में रुचि कम होने लगती है.
आत्मविश्वास की कमी
PCOS की वजह से मेटाबॉलिक समस्याएं हो सकती हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल में असंतुलन और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, इसका असर व्यक्ति की भावनात्मक सेहत पर भी पड़ता है. PCOS की वजह से मुहांसे, मोटापा और एंड्रोजेनिक एलोपेसिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
लुब्रिकेशन से जुड़ी समस्याएं
चूंकि यह बात साबित हो चुकी है कि PCOS से पीड़ित महिलाओं को अक्सर कम यौन इच्छा के कारण यौन उत्तेजना में कठिनाई होती है, इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि इस स्थिति के कारण योनि में लुब्रिकेशन की कमी भी हो जाती है.
मनोवैज्ञानिक प्रभाव
PCOS जैसी स्थितियों को संभालना अक्सर महिलाओं के लिए तनाव से भरा होता है. 2023 में ह्यूमन रिप्रोडक्शन नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के आधार पर PCOS से पीड़ित लगभग 51.5 प्रतिशत महिलाओं को यौन संबंधों को लेकर मनोवैज्ञानिक परेशानी का सामना करना पड़ता है. वास्तव में, इससे महिलाओं में बांझपन की समस्या बढ़ती है, जो उन्हें मानसिक रूप से यौन गतिविधियों से दूर कर देती है.
PCOS के लक्षण
PCOS के लक्षण में अनियमित पीरियड्स, ओवरीज में छोटे सिस्ट, कंसिव करने में दिक्कत, अनचाहे बालों का बढ़ना, वेट गेन, सिरदर्द, थकान आदि है.
किन महिलाओं को ज्यादा खतरा
जिन महिलाओं के परिवार में पीसीओएस का इतिहास रहा है, उन्हें यह समस्या होने का खतरा हो सकता है. इंसुलिन रेजिस्टेंस या हार्मोनल असंतुलन के मामलों में भी पीसीओएस का खतरा अधिक होता है. इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक रहने वाला तनाव और मेटाबॉलिक समस्याएं भी पीसीओएस होने का खतरा बढ़ा सकती हैं.
इलाज
PCOS का कोई पूरी तरह इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है. इसके लिए लाइफस्टाइल में बदलाव करें, दवाएं खा सकते हैं, कुछ मामलों में सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा, कंसीव मामले में फर्टिलिटी एक्सपर्ट से बात करें.
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी तरह का सलाह चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर या एक्सपर्ट से परामर्श करें.