World Cancer Day 2026: इन तरीकों से कैंसर को दे सकते हैं मात, एक्सपर्ट से जानें तीन इलाज और पांच तरीके?
World Cancer Day 2026: कैंसर शब्द सुनकर ही लोग के मन में डर का भाव आने लगता है. कैंसर, विज्ञान के लिए एक चुनौती के तौर पर सामने है. मेंदांता के सीनियर डायरेक्टर, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, कैंसर केयर के डॉ. कुंजहरि मेधी के दैनिक भास्कर के इंटरव्यू में बताया कि अलग-अलग डेटा के मुताबिक भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 9 लाख लोगों की जान कैंसर बीमारी की वजह से होती है.
हालांकि, विज्ञान के कई प्रयासों के बाद कुछ तरह के कैंसर के इलाज के लिए तीन उपाय काफी हद तक सही साबित हुए हैं. यानी कोई भी कैंसर अब लाइलाज नहीं है. कैंसर के तीन इलाज और जांच के पांच नए तरीकों के बारे में यहां पर जानकारी दी जा रही हैं. इससे लोगों में भी आशा की किरण जागी है.
टारगेटिंग ड्रग्स
डॉ. कुंजहरि के अनुसार, कैंसर कई बार खास जीन की खराबी की वजह से भी होता है. पहले फेफड़े और प्रैंक्रियाज कैंसर जैसी बीमारी में K-RAS जैसे म्यूटेशन को इलाज न होने वाला माना जाता था. लेकिन, मेडिकल साइंस ने अब इसका भी हल निकाला है. नई मेडिसिन से इसका इलाज भी हो रहा है. साथ ही सीडीके, आईडीएच1 और C-KIT जैसे म्यूटेशन के लिए भी दवाएं उपलब्ध हैं. यानी जिन कैंसर को पहले लाइलाज मानकर छोड़ दिया जाता था, उन्हें भी कंट्रोल में किया जा रहा है.
पर्सनलाइज्ड टीका से इलाज
डॉ. कुंजहरि के अनुसार, कोविड-19 के दौरान यूज हुई mRNA टेक्नोलॉजी कैंसर के इलाज में काफी कारगार साबित हुई. मरीज के ट्यूमर का सेंपल लेकर एक खास वैक्सीन को बनाया जाता है, जिससे इम्यून सिस्टम को ट्रेन किया जा सके. यह खास तौर पर कैंसर कोशिकाओं को खोजकर खत्म करती है. स्किन कैंसर मेलानोमा के इलाज में इसका रिजल्ट काफी अच्छा रहा है.
एंटीबॉडी और डिफेंस सिस्टम से मात
इलाज के इन तरीकों से बॉडी का इम्यून सिस्टम सुपर सोल्जर बनकर काम करता है. बाय-स्पेसिफिक एंटीबॉडी कैंसर कोशिका और इम्यून कोशिका दोनों से जुड़कर उन्हें आमने-सामने लाकर खड़ी करती है, जिससे हमारा सिस्टम उसे खत्म कर सके. डॉ. कुंजहरि के अनुसार,ब्लड कैंसर में इस थेरेपी से ऐसे कई मरीजों को बचाया गया, जिन्हें बचाना नामुमकिन था. इससे मरीजों में भी एक उम्मीद जागी है.
ब्लड सैंपल से जांच
डॉ. कुंजहरि के अनुसार, लिक्विड बायोप्सी में केवल ब्लड या यूरिन की जांच होती है. कैंसर कोशिकाएं ब्लड में डीएनए छोड़ती हैं, जिसे इस टेस्ट द्वारा पहचाना जाता है. हालांकि, अभी यह महंगा है लेकिन फ्यूचर में यह बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.
एआई से कैंसर की जांच
डॉ. कुंजहरि के अनुसार, एआई इमेजिंग भी इसमें काफी कारगार साबित हो रहा है. जब मैमोग्राफी, सीटी स्कैन या स्किन टेस्ट को एआई सॉफ्टवेयर की मदद से जांचा जाता है, तो यह 40 प्रतिशत तक रिजल्ट एकदम सटीक प्रदान करता है. कभी-कभी एक्सपीरियंस डॉक्टर भी उन चीजों को मिस कर देता, जिन्हें एआई पहचान लेता है.
MECD टेस्ट से पहचान
एमईसीडी एक तरह का ब्लड टेस्ट है, जो पैंक्रियाज और गॉलब्लैडर जैसे 18 से अधिक कैंसर में लक्षण दिखने के पहले ही कैच कर लेता है. यह ऐसे कैंसर के इलाज में काफी फायदेमंद है, जिनकी नियमित तौर पर स्क्रीनिंग नहीं हो पाती. बता दें कि अमेरिका में GAlleri और कैंसर गार्ड जैसे टेस्ट मौजूद हैं.
जीन की पहचान
डॉ. कुंजहरि के अनुसार, इस जांच में ट्यूमर के जीन की पूरी इंफोर्मेंशन ली जाती है. इससे पता चलता है कि कैंसर किस विशेष जीन की खराबी या म्यूटेशन से हुआ है. फिर उसी के मुताबिक, काम करने वाली मेडिसिन दी जाती है. इससे इलाज भी असरदार होता है और कैंसर के फिर से होने का खतरा भी कम रहता है.
तकनीक से ट्यूमर की जांच
नैनोपार्टिकल्स कैंसर कोशिकाओं से चिपके होते हैं. ऐसे में रेडियोधर्मी दवाओं को नैनोपार्टिकल्स से जोड़ा जाता है. स्कैन में ट्यूमर स्पष्ट दिखाई देता है. डॉक्टर बताते हैं कि भविष्य में हेल्दी कोशिकाओं को बिना कोई नुकसान पहुंचाए, इसी तरीके से कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सकेगा.
जीवनशैली से जुड़ी बीमारी
कैंसर के बारे में डॉ. अनिल ठकवानी कहते हैं कि यह बीमारी हमारी जीवनशैली से जुड़ी होती है. उनके अनुसार, लंच ब्रेक के बाद हफ्ते में पांच दिन 30 मिनट तक वॉक करना चाहिए. इससे बीमारियों का खतरा घटता है. साथ ही रात का खाना 9 बजे से पहले और सोने के दो घंटे पहले करना चाहिए. दिन में रोज 2 लीटर पानी पीना चाहिए. इससे कैंसर वाले एजेंट्स यूरिन से बाहर हो जाते हैं. रोज एक सेब खाना चाहिए और सप्ताह में उपवास करने से कैंसर जैसी बीमारी भी दूर रहती है.
डिस्क्लेमर
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