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नई दिल्ली. इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (Indian Premier League 2026) से पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कुछ ऐसे नियम लागू किए हैं, जिनका सीधा असर टीमों की तैयारी और मैच के माहौल पर पड़ेगा. खास तौर पर ‘नेट स्पाइंग’ और ‘फ्रेश पिच’ जैसे नियम इस बार चर्चा में हैं, जिनका मकसद खेल को और ज्यादा निष्पक्ष बनाना है. आइए जानते हैं ये क्या होते हैं.
क्या है ‘नेट स्पाइंग’?
अक्सर टीमें एक-दूसरे के प्रैक्टिस सेशन पर नजर रखने की कोशिश करती हैं, ताकि विरोधी टीम की रणनीति या खिलाड़ियों की कमजोरी का अंदाजा लगाया जा सके. यही ‘नेट स्पाइंग’ कहलाता है. अब इसे रोकने के लिए BCCI ने सख्त कदम उठाया है. नए नियमों के मुताबिक कोई भी टीम विरोधी टीम के अभ्यास सत्र के आसपास नहीं जा सकेगी और न ही किसी तरह की जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकेगी.
‘फ्रेश पिच’ नियम क्या कहता है?
इस नियम के तहत जिस पिच पर मैच खेला जाना है, उस पर किसी भी टीम को प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं होगी. पहले कई बार टीमें मैच वाली पिच पर अभ्यास कर लेती थीं, जिससे उन्हें फायदा मिल सकता था. अब इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, ताकि दोनों टीमों को बराबरी का मौका मिले.
‘मेन स्क्वायर ब्लैकआउट’ क्या है?
इसके तहत मैच से पहले मुख्य पिच एरिया को कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. इस दौरान वहां किसी भी खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ की एंट्री नहीं होगी. इससे पिच की स्थिति को सुरक्षित रखा जा सकेगा और किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना खत्म होगी.
फ्रेंचाइज़ी के लिए क्या हैं नई गाइडलाइंस?
नई गाइडलाइंस के मुताबिक टीमों को सिर्फ तय नेट एरिया में ही अभ्यास करना होगा. विरोधी टीम के सेशन पर नजर रखना या वहां जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. साथ ही हर फ्रेंचाइज़ी को इन नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा.