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नई दिल्ली. भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में बंगाल की टीम का सफर भले ही खत्म हो गया, लेकिन खिलाड़ियों ने मैदान पर शानदार जज्बा दिखाया. उन्हें जम्मू कश्मीर टीम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. जम्मू कश्मीर ने इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बनाई. औकिब नबी ने जम्मू कश्मीर के जीत में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने कुल 8 विकेट अपने नाम किए और जम्मू को फाइनल में पहुंचाया.
इस मुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की रही. उन्होंने पहली पारी में घातक गेंदबाजी करते हुए 8 विकेट झटके और विरोधी टीम को बड़ी बढ़त लेने से रोका. शमी की रफ्तार, स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ ने बल्लेबाजों को परेशान किया. उनका यह प्रदर्शन दिखाता है कि वह अब भी घरेलू क्रिकेट में कितने प्रभावशाली हैं.
बल्लेबाजी में उतार-चढ़ाव
बंगाल की पहली पारी संतुलित रही. शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी निभाई और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. हालांकि, दूसरी पारी में बल्लेबाजी बिखर गई. शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से दबाव बढ़ा और मध्यक्रम उस दबाव से उबर नहीं सका. यही वह क्षण था, जहां से मुकाबला हाथ से निकलता गया.
फील्डिंग और जज्बे ने जीता दिल
हार के बावजूद बंगाल की फील्डिंग और मैदान पर ऊर्जा काबिल-ए-तारीफ रही. खिलाड़ियों ने पूरे मैच में लड़ने का जज्बा दिखाया और अंत तक मुकाबले में बने रहे. हालांकि फाइनल का सपना अधूरा रह गया, लेकिन इस सीजन का अनुभव टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. युवा खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिला और टीम ने साबित किया कि वह भविष्य में खिताब की मजबूत दावेदार बन सकती है.