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MS Dhoni: मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान एमएस धोनी को ₹10 लाख जमा करने का निर्देश दिया है. यह आदेश उनके ₹100 करोड़ के मानहानि (डिफेमेशन) केस से जुड़ा हुआ है. अदालत ने कहा है कि यह राशि अगली सुनवाई से पहले जमा करनी होगी. आखिर कोर्ट ने उन्हें 10 लाख रुपए जमा करने के लिए क्यों कहा है? आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
धोनी ने साल 2014 में यह मामला दर्ज कराया था. उन्होंने एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और कुछ मीडिया संस्थानों के खिलाफ केस किया था. धोनी का कहना है कि उन्हें 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी और स्पॉट-फिक्सिंग विवाद से गलत तरीके से जोड़ा गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा. इसी वजह से उन्होंने ₹100 करोड़ हर्जाने की मांग की थी.
धोनी को क्यों देने होंगे 10 लाख?
हाल ही में अदालत ने जो आदेश दिया है, वह सीधे तौर पर आरोपों से जुड़ा नहीं है. दरअसल, इस केस में कुछ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग्स सबूत के तौर पर जमा की गई हैं. अब इन रिकॉर्डिंग्स को लिखित रूप में तैयार करना और उनका अनुवाद करना जरूरी है, ताकि अदालत में ठीक से जांच हो सके. इस काम के लिए विशेषज्ञों की मदद लेनी होगी और इसमें काफी समय लग सकता है.
सभी की नजर अगली सुनवाई पर
अदालत का मानना है कि चूंकि धोनी इस केस में वादी हैं, इसलिए इस प्रक्रिया का खर्च उन्हें उठाना चाहिए. ₹10 लाख की यह राशि इसी काम के लिए जमा कराई जाएगी. यह मामला पिछले कई सालों से चल रहा है और अभी भी सुनवाई जारी है. धोनी के नाम और केस की बड़ी रकम की वजह से यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है.