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नई दिल्ली. न्यूजीलैंड के ग्लेन फिलिप्स (Glenn Philips) आज दुनिया के सबसे तेज और फुर्तीले फील्डरों में गिने जाते हैं. मैदान पर उनकी एनर्जी और तेजी अक्सर फैंस को हैरान कर देती है. कई बार वह हवा में छलांग लगाकर ऐसे कैच पकड़ लेते हैं जिन्हें देखना ही रोमांचक होता है. लेकिन वह ऐसा कैसे कर लेते हैं, इसके पीछे एक बड़ी वजह छिपी हुई है. आइए जानते हैं कैसे उन्होंने अपने आप को इस काबिल बनाया है.
काफी कम लोग जानते हैं कि फिलिप्स बचपन से ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) नाम की समस्या से जूझते रहे हैं. ADHD एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को लंबे समय तक ध्यान लगाकर काम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. बचपन में ग्लेन फिलिप्स को भी पढ़ाई और दूसरी चीजों पर ध्यान बनाए रखने में परेशानी होती थी. लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं बनने दिया और अपनी अतिरिक्त ऊर्जा को खेल में लगा दिया.
भारत के खिलाफ शानदार फील्डिंग
क्रिकेट के मैदान पर यही एनर्जी उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई. न्यूजीलैंड के लिए खेलते हुए फिलिप्स अक्सर शानदार फील्डिंग करते नजर आते हैं. बाउंड्री पर दौड़कर कैच पकड़ना हो या तेजी से रन-आउट करना, वह हर बार पूरा जोर लगाते हैं. उनकी फील्डिंग कई बार टीम के लिए मैच का रुख बदल देती है. भारत के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भी ग्लेन शानदार फील्डिंग करते हुए नजर आ रहे थे.
फाइनल में हारा न्यूजीलैंड
ग्लेन फिलिप्स की कहानी यह बताती है कि अगर इंसान मेहनत करे और खुद पर भरोसा रखे तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है. ADHD जैसी परेशानी के बावजूद उन्होंने क्रिकेट में बड़ी पहचान बनाई है और आज वह लाखों फैंस के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. हालांकि, ग्लेन की शानदार फील्डिंग के बावजूद न्यूजीलैंड की खराब बल्लेबाजी औऱ गेंदबाजी के कारण उन्हें फाइनल में हार का सामना करना पड़ा.