51
नई दिल्ली. टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब भारत अपने नाम कर पाता या नहीं ये आज भी फैंस के मन में सवाल है. लेकिन वर्ल्ड कप के बीच भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर का एक भावुक बयान याद आता है, जो 2 अप्रैल 2011 की उस ऐतिहासिक रात की अहमियत को पूरी तरह बयान करता है. उस यादगार पल को याद करते हुए गावस्कर ने कहा था, “जब मैं मरूं, तो आखिरी चीज जो देखना चाहूं, वह 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में धोनी का लगाया हुआ छक्का हो.”
यह बयान बताता है कि एम एस धोनी का वह छक्का सिर्फ एक शॉट नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा पल था. आईसीसी वर्ल्ड कप 2011 का फाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े में खेला गया था और पूरा देश सांस थामे बैठा था. भारत को जीत के लिए 4 रन चाहिए थे. दबाव के उस माहौल में धोनी ने नुवान कुलसेकरा की गेंद पर आगे बढ़कर लंबा छक्का जड़ दिया और भारत को श्रीलंका के खिलाफ जीत दिलाई थी.
गेंद जैसे ही स्टैंड्स में पहुंची, पूरा देश जश्न में डूब गया. इस छक्के के साथ भारत ने 28 साल बाद वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने नाम की. गावस्कर जैसे महान खिलाड़ी के लिए उस छक्के को जिंदगी के आखिरी पल में देखने की इच्छा जताना उसकी ऐतिहासिक अहमियत को दर्शाता है. यह सिर्फ जीत का शॉट नहीं था, बल्कि नेतृत्व, आत्मविश्वास और धैर्य का प्रतीक था.
धोनी की नाबाद 91 रनों की पारी और खुद को ऊपर बल्लेबाजी के लिए भेजने का फैसला उनकी कप्तानी की मिसाल बन गया. वह छक्का आज भी हर भारतीय क्रिकेट फैन के दिल में जिंदा है. एक ऐसा पल, जो हमेशा याद रखा जाएगा. वर्ल्ड कप फाइनल में गौतम गंभीर ने शानदार 97 रन की पारी खेली थी और युवराज सिंह ने भी अंत के ओवरों में बढ़िया बल्लेबाजी की थी.