Team India Key Challenges: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में भारत का जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच होने वाला है. यह मैच भारत के लिए सेमीफाइनल में जाने के लिहाज से काफी अहम होगा. हालांकि इस मुकाबले से पहले भी भारत के सामने कई ऐसी चुनौतियां हैं, जिनसे निपटना बेहद जरूरी है. भारतीय टीम की सबसे बड़ी परेशानी उनकी बैटिंग टॉप ऑर्डर है, जिसने इस टी20 वर्ल्ड कप में निराशाजनक प्रदर्शन किया है. इसके अलावा भारत के सामने नेट रन रेट का काफी दबाव रहेगा, जो साउथ अफ्रीका से मिली हार के बाद बहुत ही खराब हो गया है. भारत सुपर-8 के ग्रुप-1 में तीसरे नंबर पर है. उनका नेट रन रेट (NRR) -0.3800 है. ऐसे में भारतीय टीम पर दबाव होगा कि वो जिम्बाब्वे को बड़े अंतर से हराए, जिससे NRR पॉजिटिव में आ सके. इसके अलावा भारतीय टीम के सामने अन्य कई बड़ी चुनौतियां हैं. देखें पूरी लिस्ट…
टॉप ऑर्डर की बल्लेबाजी
भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बेहद खराब प्रदर्शन किया है. मौजूदा विश्व कप में भारत की ओपनिंग जोड़ी (अभिषेक शर्मा और ईशान किशन) का बैटिंग पार्टनरशिप एवरेज सिर्फ 6.8 का है. यह सभी टीमों में सबसे कम है. भारत के बाएं हाथ के ओपनर बल्लेबाज अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) 4 मैचों में 3 बार लगातार डक पर आउट हो चुके हैं. उनके बल्ले से आखिरी मुकाबले में सिर्फ 15 रन ही आए थे. हालांकि ईशान किशन ने इस टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी की है. इसके अलावा तीसरे नंबर पर तिलक वर्मा भी अभी तक बल्लेबाजी में जूझते नजर आए हैं. उनके बल्ले से अभी तक एक भी बड़ी पारी नहीं आई है. साथ ही काफी धीमी बल्लेबाजी करते हैं, जिससे लोअर ऑर्डर के बल्लेबाजों पर दबाव आ जाता है.
ऑफ-स्पिन की कमजोरी
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम के बल्लेबाज ऑफ स्पिनर के खिलाफ काफी जूझते दिखाई दे रहे हैं. भारत के बल्लेबाज ऑफ स्पिन की गेंदबाजी के सामने संघर्ष करते दिखाई दिए हैं. इस टूर्नामेंट के पहले चार मैचों में भारत के 31 विकेट गिरे हैं, जिनमें से 15 विकेट स्पिनर्स ने चटकाए. इन 15 विकेट में से 11 विकेट सिर्फ ऑफ-स्पिनर के खाते में आए. सुपर-8 के पहले मुकाबले में ऑफ स्पिनर एडन मारक्रम के पहले ही ओवर में ईशान किशन ने अपना विकेट गंवा दिया था. वहीं, अभिषेक शर्मा ने पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ ऑफ स्पिनर के सामने अपना विकेट गंवाया था. ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ भी भारत के सामने ऑफ-स्पिन गेंदबाजी की चुनौती रहेगी.
मिडिल ऑर्डर का भी खराब फॉर्म
भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज भी बीच के ओवरों में काफी संघर्ष करते दिखाई दिए हैं. कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने टूर्नामेंट के पहले मैच में यूएसए के खिलाफ 84 रनों की पारी खेली थी. इसके बाद उनके बल्ले से कोई बड़ी पारी नहीं आई है. साथ ही वो मिडिल ऑर्डर में धीमी बल्लेबाजी करते नजर आए हैं. इसके अलावा रिंकू सिंह भी अपनी लय हासिल नहीं कर पाए हैं. साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मैच में रिंकू सिंह का पास अच्छी पारी खेलने का मौका था, लेकिन वो जीरो पर आउट होकर लौट गए थे. रिंकू सिंह ने मौजूदा विश्व कप में 5 मैचों में सिर्फ 24 रन बनाए हैं.
धीमी गेंद के सामने परेशानी
इस विश्व कप में भारतीय टीम ऑफ स्पिन के अलावा धीमी गेंदों के खिलाफ भी जूझते दिखाई दिए हैं. आंकड़ों पर नजर डालें, तो सुपर 8 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत ने धीमी गेंदों के खिलाफ औसतन सिर्फ 15.33 रन बनाए हैं, जो सभी टीमों में सबसे कम है. भारत के बल्लेबाजों ने धीमी गेंदों पर सबसे ज्यादा 40 फीसदी से ज्यादा डॉट खेले हैं. इसके अलावा पेस ऑफ गेंदों पर 14.1 गेंदों पर एक विकेट गंवाया है. माना जा रहा है कि चेन्नई के मैदान पर भी गेंदबाज धीमी गेंदों का ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं.
नेट रन रेट का दबाव
फिलहाल भारतीय टीम सुपर-8 के ग्रुप-1 में तीसरे नंबर पर है. भारतीय टीम का नेट रन रेट (NRR) -3.800 है. ऐसे में भारत टीम को जिम्बाब्वे के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज करनी होगी. भारत के नेट रन रेट को पॉजिटिव में करने के लिए जिम्बाब्वे के खिलाफ लगभग 80 रनों से जीत हासिल करनी होगी. ऐसे में इस मुकाबले में भारतीय टीम पर NRR का काफी दबाव होगा.