<

Explained: क्या है टेस्टिकुलर टॉर्शन? क्या यह है इतना गंभीर कि तिलक वर्मा को करानी पड़ी इमरजेंसी सर्जरी; जानें कारण-बचाव

What Is Testicular Torsion: भारतीय क्रिकेटर तिलक वर्मा को अचानक पेट में तेज दर्द होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां पर पता चला कि वह टेस्टिकुलर टॉर्शन से जूझ रहे हैं, जिसके चलते तुरंत उनकी सर्जरी कराई गई.

What Is Testicular Torsion: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज तिलक वर्मा गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं. इसके चलते उनकी इमरजेंसी सर्जरी कराई गई. तिलक वर्मा विजय हजारे ट्रॉफी का मैच खेलने के लिए राजकोट पहुंचे थे. बुधवार को उनके पेट में अचानक तेज दर्ज हुआ, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. जांच के बाद डॉक्टरों ने टेस्टिकुलर टॉर्शन (अंडकोष में खिंचाव) की पुष्टि की. ऐसे में तिलक वर्मा को इमरजेंसी सर्जरी करानी पड़ी. इसके चलते वह न्यूजीलैंड के खिलाफ 21 जनवरी से शुरू होने वाले टी20 इंटरनेशनल सीरीज से भी बाहर हो गए हैं. अगर वह इस महीने के अंत तक फिट नहीं हुए, तो उन्हें टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होना पड़ेगा. डॉक्टरों की मानें, तो तिलक वर्मा को रिकवर होने में 3-4 हफ्ते लग सकते हैं.

बता दें कि टेस्टिकुलर टॉर्शन एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें अंडकोष (testicle) अपने स्पर्मेटिक कॉर्ड (नसों वाली नली) पर मुड़ जाता है. इससे अंडकोष में ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है. इसकी वजह से तेज दर्द होता है. साथ ही उस हिस्से पर सूजन और लालिमा भी होती है. जानें इसका कितना जोखिम हो सकता है…

क्या है टेस्टिकुलर टॉर्शन?

यूरोलॉजी केयर फाउंडेशन के अनुसार, टेस्टिकुलर टॉर्शन(वृषण मरोड़) वह स्थिति है जब अंडकोष के आसपास के ऊतक (tissues) ठीक से जुड़े नहीं होते हैं. इससे अंडकोष शुक्राणु नलिका के चारों ओर मुड़ सकता है. ऐसा होने पर, अंडकोष में रक्त प्रवाह रुक जाता है. इससे दर्द और सूजन हो सकती है, और इसका इलाज आपातकालीन स्थिति में किया जाना चाहिए.
डॉक्टरों की मानें, ऐसी स्थिति में तुरंत इलाज मिलना बहुत जरूरी होता है. अगर समय पर इमरजेंसी सर्जरी न कराई जाए, तो अंडकोष को स्थायी नुकसान हो सकता है या उसे निकालना भी पड़ सकता है. अंडकोष लिंग के नीचे स्थित थैलीनुमा भाग में मौजूद प्रजनन अंग हैं, जो हार्मोन और शुक्राणु बनाते हैं. ऐसे में तत्काल सर्जरी कराना बेहद जरूरी होता है. वैसे तो यह मेडिकल इमरजेंसी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन ज्यादातर किशोरों (12-18 साल) में होता है. अगर इसे नजरअंदाज किया जाता है, तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं. 

किस वजह से होता है टेस्टिकुलर टॉर्शन?

एक्सपर्ट्स की मानें, तो यह आमतौर पर स्वतःस्फूर्त (Spontaneous) घटना होती है. इसका मतलब है कि यह बिना किसी स्पष्ट कारण के हो सकती है. यह लगभग हमेशा सिर्फ एक अंडकोष को प्रभावित करती है. आमतौर पर इससे बाएं अंडकोष पर असर पड़ता है. इसके अलावा जन्मजात दोष के कारण भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है. दरअसल, कुछ बच्चों में अंडकोष स्क्रोटम (अंडकोश की थैली) से मजबूती से नहीं जुड़ा होता. इस स्थिति में अंडकोष ‘घंटी के पेंडुलम’ की तरह स्वतंत्र रूप से लटकता है और आसानी से घूम सकता है. इससे यह आसानी से मुड़ सकती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन रुक सकता है.
इसके अलावा अंडकोष या स्कंदना में चोट लगने के बाद भी हो ऐसी स्थिति बन सकती  है. हालांकि फिजिकल एक्टिविटीज के दौरान ऐसा नहीं होता है, लेकिन कूदने, झपट्टा मारने, शरीर को मोड़ने अन्य किसी काम में अंडकोष में मरोड़ का कारण नहीं बनती, लेकिन ज्यादा व्यायाम या खेलकूद के बाद यह समस्या हो सकती है.

इमरजेंसी सर्जरी है एकमात्र इलाज

टेस्टिकुलर टॉर्शन होने पर मरीज को तुरंत इमरजेंसी सर्जरी की जरूरत होती है, वरना उसके अंडकोष को खतरा होता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, 6-12 घंटे के भीतर सर्जरी न होने पर अंडकोष को बचाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में उसे निकालना पड़ सकता है. यही वजह है कि तिलक वर्मा को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर तत्काल उनकी सर्जरी हुई.
अगर 4-6 घंटे के अंदर इलाज मिल जाए, तो अंडकोष बचा लिया जाता है. वहीं, अगर इलाज मिलने में 12 घंटे से ज्यादा समय लग जाए, तो लगभग 50 फीसदी लोगों का अंडकोष सुरक्षित रहता है. वहीं, अगर 24 घंटे बाद इलाज मिलता है, तो सिर्फ 10 फीसदी लोगों का ही अंडकोष बच पाता है.

क्या हैं लक्षण?

टेस्टिकुलर टॉर्शन के कई लक्षण हैं, जिससे पता चलता है कि मरीज इस बीमारी से जूझ रहा है. इस स्थिति में अंडकोष में अचानक, तेज दर्द होता है. यह दर्ज जागते-सोते, या बैठ होने पर कभी भी हो सकता है. इसके अलावा कई अन्य लक्षण भी हैं…

  • अंडकोष के एक तरफ दर्दनाक सूजन
  • एक अंडकोष का दूसरे की तुलना में ज्यादा ऊपर होना
  • अंडकोष पर दिखाई देने वाली गांठ
  • रंग बिगाड़ना
  • पेट में तेज दर्द
  • सामान्य से ज्यादा पेशाब आना
  • तेज बुखार

रिकवरी में कितना समय लगता है?

टेस्टिकुलर टॉर्शन की सर्जरी के बाद पूरी तरह ठीक होने में आमतौर पर करीब 2 से 4 हफ्ते का समय लगता है. इस दौरान एक-दो हफ्ते तक मरीज को आराम करना होता और फिजिकल एक्टिविटी से बचना होता है. इसके बाद जब टांके 2-3 सप्ताह में घुल जाते हैं, तो 1-2 हफ्ते बाद नॉर्मल एक्टिविटी कर सकते हैं. 

Ankush Upadhyay

अंकुश उपाध्याय युवा पत्रकार हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (CCS) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई की है. फिलहाल वह इंडिया न्यूज डिजिटल के साथ जुड़कर स्पोर्ट्स के लिए लेखन का काम कर रहे हैं. इससे पहले वह हरिभूमि डिजिटल डिपार्टमेंट में बतौर लेखक अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

Recent Posts

Acid Reflux: रातों की नींद हराम कर सकता है एसिड रिफ्लक्स? जल्द राहत पाने के लिए करें ये 6 आसान उपाय

Acid Reflux: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खानपान ने एसिड रिफ्लक्स (GERD) को…

Last Updated: June 22, 2026 16:55:16 IST

NZ से हारते ही इंग्लैंड को याद आए बेन स्टोक्स, सजा खत्म कर सौंपी टीम की कमान, ये खूंखार गेंदबाज भी लौटा

England Cricket Team: दूसरे टेस्ट में न्यूजीलैंड के खिलाफ शर्मनाक हार के बाद बेन स्टोक्स…

Last Updated: June 22, 2026 13:20:39 IST

Funny Jokes: तुम मुझे कितना प्यार करते हो? पत्नी के पूछने पर पति ने दिया ऐसा जवाब, सुनकर छूट जाएगी हंसी

Funny Joke of the Day: योग गुरु और हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर लोगों को ज्यादा से…

Last Updated: June 21, 2026 15:40:30 IST

DDCA में हितों के टकराव का कथित दावा, सदस्यों ने खड़े किए बड़े सवाल

DDCA News: डीडीसीए के एपेक्स काउंसिल ​​से जुड़े 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट' (हितों के टकराव) को…

Last Updated: June 21, 2026 15:48:30 IST

Rohit Sharma: रोहित शर्मा ने तीसरे वनडे में रचा इतिहास, 1-2, नहीं तोड़ डाले कई बड़े रिकॉर्ड

Rohit Sharma Records: रोहित शर्मा ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे में 79 रनों की…

Last Updated: June 21, 2026 12:34:41 IST

Diarrhea से परेशान, फिर भी बल्ला लेकर मैदान में उतरे, खेली धमाकेदार इनिंग, भारत को 183 रन से जिताया

ये घटना 2003 विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम और श्रीलंका क्रिकेट टीम के बीच…

Last Updated: June 22, 2026 17:20:46 IST