नई दिल्ली. क्रिकेट को अक्सर “जेंटलमैन गेम” कहा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर का दबाव कई बार खिलाड़ियों और कोच की भावनाओं को भड़का देता है. ऐसा ही एक वाकया साल 2002 में इंग्लैंड दौरे (नेटवेस्ट ट्रॉफी) के दौरान हुआ, जब टीम इंडिया के पूर्व मुख्य कोच जॉन राइट ने वीरेंद्र सहवाग को ड्रेसिंग रूम में कड़ी फटकार लगाई.
उस समय सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम बदलाव के दौर से गुजर रही थी. जॉन राइट खिलाड़ियों में अनुशासन, धैर्य और मैच की स्थिति के हिसाब से खेलने की आदत डालना चाहते थे. दूसरी ओर, सहवाग अपनी निडर और आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर थे. उनका बेखौफ अंदाज दर्शकों को रोमांचित करता था, लेकिन कभी-कभी टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता का कारण बन जाता था.
सहवाग पर उठाया था हाथ
यह घटना नेटवेस्ट ट्रॉफी के एक वनडे मैच में हुई. भारत को 202 रन का छोटा लक्ष्य मिला था और टीम को संभलकर बल्लेबाज़ी करनी थी. लेकिन सहवाग ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की और जल्दी आउट हो गए. जॉन राइट को यह गैर-जिम्मेदाराना शॉट लगा. जैसे ही सहवाग ड्रेसिंग रूम लौटे राइट का गुस्सा फूट पड़ा. साथियों के मुताबिक, उन्होंने सहवाग की कॉलर पकड़ ली, उन्हें डांटा और गुस्से में हाथ भी उठा दिया. उस पल ड्रेसिंग रूम में सन्नाटा छा गया था.
सहवाग ने गलती स्वीकार की
हैरानी की बात यह रही कि सहवाग शांत रहे. उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और कोई बहस नहीं की. बाद में दोनों ने बात साफ की और मामला वहीं खत्म हो गया. आने वाले वर्षों में न तो रिश्तों में कड़वाहट आई और न ही टीम पर असर पड़ा. सहवाग भारत के सबसे विस्फोटक ओपनर बने और राइट एक सम्मानित कोच के रूप में याद किए गए. आज यह घटना क्रिकेट के दबाव और जुनून की एक मिसाल बन चुकी है.