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एक समय था जब भारत के घरेलू मैदान टेस्ट क्रिकेट में विरोधी टीमों के लिए किसी किले से कम नहीं थे. लगभग एक दशक तक भारत को घर में हराना नामुमकिन माना जाता था. लेकिन हाल के वर्षों में यह दबदबा कमजोर पड़ता दिख रहा है. लगातार हार और बल्लेबाजों की अस्थिरता ने सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर इतनी प्रतिभाशाली टीम टेस्ट क्रिकेट में क्यों संघर्ष कर रही है? भारत टेस्ट रैंकिंग में भी चौथे नंबर पर हैं. आइए जानते हैं पूर्व कोच राहुल द्रविड़ ने इसपर क्या कहा है?
पूर्व भारतीय कोच राहुल द्रविड़ मानते हैं कि समस्या खिलाड़ियों की क्षमता नहीं, बल्कि तैयारी की कमी है.सद्रविड़ के अनुसार आज के खिलाड़ी लगातार टेस्ट, वनडे और टी20 फॉर्मेट के बीच स्विच कर रहे हैं, जिससे उन्हें टेस्ट क्रिकेट के लिए खास तैयारी का समय ही नहीं मिल पाता. उन्होंने कहा, कई बार खिलाड़ियों को टेस्ट मैच से पहले सिर्फ तीन-चार दिन की तैयारी मिलती है और कई महीनों तक उन्होंने लाल गेंद का सामना भी नहीं किया होता.”
समय की कमी
द्रविड़ ने कहा, हमारे समय में किसी टेस्ट सीरीज से पहले एक महीना तक लाल गेंद से अभ्यास करने का मौका मिलता था. अब वह समय नहीं मिलता. इसका असर साफ दिख रहा है. बल्लेबाज जल्दबाजी में आउट हो रहे हैं, तकनीक दबाव में टूट रही है और लंबी पारियां, जो कभी भारत की ताकत थीं, अब कम नजर आती हैं.
टी20 को प्राथमिकता
विडंबना यह है कि यही सिस्टम भारत को टी20 में मजबूत बना रहा है. लगातार छोटे फॉर्मेट में खेलने से खिलाड़ी आक्रामक और निडर हो गए हैं. द्रविड़ का संदेश साफ है कि समस्या प्रतिभा की नहीं, समय की है. अगर खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट के लिए अलग से तैयारी का मौका नहीं मिला, तो भारत की लाल गेंद वाली बादशाहत और कमजोर पड़ सकती है, भले ही टी20 में सफलता मिलती रहे.