7
नई दिल्ली. भारत के पूर्व स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह ने 2019 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया था. उन्होंने अपने इस फैसले के पीछे छिपी भावनात्मक और मानसिक चुनौतियों पर खुलकर बात की है. उन्होंने साफ कहा कि यह निर्णय फिटनेस या फॉर्म की वजह से नहीं, बल्कि खेल में खुशी और सम्मान की कमी के कारण लिया गया था. उनके इस बयान से क्रिकेट जगत में खलबली मच गई है. आइए जानते हैं उन्होंने पूरी बात क्या कही हैय
2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप में भारत की ऐतिहासिक जीत के नायक रहे युवराज का करियर कई यादगार पलों से भरा रहा. लेकिन करियर के आखिरी दौर में सीमित मौके, चयन में नजरअंदाज किया जाना उन्हें मानसिक रूप से कमजोर करने लगा. युवराज सिंह ने सानिया मिर्जा के साथ इंटरव्यू में कहा “मैं अपने खेल का आनंद नहीं ले रहा था. मैं सोच रहा था कि जब मुझे मजा ही नहीं आ रहा, तो मैं क्रिकेट क्यों खेल रहा हूं. मुझे न तो समर्थन मिल रहा था और न ही इज्जत. मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है. फिर मैं ऐसी चीज से क्यों जुड़ा रहूं, जिसका आनंद नहीं ले रहा? खुद को साबित करने के लिए मुझे और क्यों खेलना चाहिए?”
मैं खुद जैसा महसूस करने लगा
2019 वनडे वर्ल्ड कप टीम से बाहर किया जाना उनके लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ. तभी उन्हें एहसास हुआ कि बिना खुशी और आत्मसम्मान के खेलते रहना सही नहीं है. उन्होंने बताया, “जिस दिन मैंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना बंद किया, मैं फिर से खुद जैसा महसूस करने लगा. हम सभी इस दौर से गुजरते हैं.”
युवराज ने किया फैंस के दिलों पर राज
हालांकि उनका करियर भावुक अंत के साथ खत्म हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी अमिट है. छह छक्कों का कारनामा हो या कैंसर से जंग लड़कर वापसी, युवराज की कहानी आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है. उनका सफर बताता है कि कभी-कभी खुद की शांति और सम्मान सबसे बड़ा फैसला होता है. युवराज ने अपने खेल के दम पर करोड़ों फैंस के दिल में जगह बनाई है.