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West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (west Bengal Assembly Election 2026) जल्द ही होने वाले हैं, जिसमें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को टक्कर देने के लिए बीजेपी अपनी कमर कस चुकी है, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस चुनाव में कांग्रेस बिना किसी के साथ हाथ मिलाए अकेली 294 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
यह फैसला दिल्ली में पार्टी की एक मीटिंग के बाद लिया गया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और राज्य नेतृत्व शामिल हुए. ऐसे में हर किसी के मन में सवाल खड़ा हो रहा है कि कांग्रेस ने चुनाव अकेले लड़ने का फैसला क्यों उठाया और 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी को कितने वोट मिले थे और राज्य में कांग्रेस कब से सत्ता से बाहर है. चलिए विस्तार से जानें पूरी खबर.
कांग्रेस ने चुनाव अकेले लड़ने का फैसला क्यों लिया?
सबसे पहला सवाल तो यह खड़ा होता है कि कांग्रेस ने बंगाल विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला क्यों लिया होगा. इस पर पार्टी के राज्य प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा कि चर्चा के बाद, यह फैसला किया गया है कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और उसी के अनुसार तैयारी करेगी.
राज्य कांग्रेस का कहना है कि पिछले गठबंधनों ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर किया था, और अब पार्टी अपनी ताकत फिर से बनाना चाहती है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीति पहले से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तेज ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रही है. कांग्रेस का यह कदम चुनावी समीकरणों को और उलझा सकता है.
कांग्रेस को बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में कितने सीट मिलें?
बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में 292 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 213 सीटें मिली थी, जिसके बाद पार्टी लगातार तीसरी बार बंगाल की सत्ता में लौटी है, वहीं बीजेपी को 44 सीटें मिली, जिसके बाद भाजपा राज्य की सबसे बड़ी दूसरी पार्टी बनकर उभरी. हैरान करने वाली बात तो तब हुई जब 2021 के चुनाव में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाया.
कांग्रेस को 2.93 परसेंट वोट मिले लेकिन वह एक भी सीट नहीं जीत पाई. लेफ्ट फ्रंट, जिसने कांग्रेस और पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी, इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, ज़ीरो सीटों पर सिमट गया. ये दोनों लंबे समय से राज कर रही पार्टियां एक साथ भी आईं, लेकिन बंगाल की जनता ने उन्हें नकार दिया.
कांग्रेस बंगाल की सत्ता से कब से बाहर है?
अब सबसे अहम सवाल कि कांग्रेस बंगाल की सत्त से कब से बाहर है, तो इसका जवाब है कि कांग्रेस बंगाल की सत्ता में दशकों से बाहर है. कांग्रेस की 1970 के दशक के बीच तक बंगाल में मज़बूत पकड़ थी, लेकिन 1977 में पार्टी राज्य की सत्ता से बाहर हो गई और लेफ्ट फ्रंट ने 1977 से लेकर 2011 तक बंगाल पर राज किया. इसके बाद 2011 से लेकर वर्तमान समय में तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने बंगाल की सत्ता को संभला.