बिहार अगले साल से नालंदा और पटना के बीच कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए 13,000 करोड़ रुपये की नेशनल हाईवे परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है.
बिहार में करोड़ो के हाईवे प्रोजेक्ट्स
National Highways: रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट (RCD) अगले फाइनेंशियल ईयर से दो बड़े नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है. इन प्रोजेक्ट्स में मसराख-छपरा-चकिया-भीठामोर हाईवे (NH-227 और 227A) और अरवल-जहानाबाद-बिहार शरीफ हाईवे (NH-110) शामिल हैं. इन दोनों प्रोजेक्ट्स की कुल लागत लगभग ₹13,000 करोड़ है.
इस बीच अधिकारियों ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स से ज़मीन अधिग्रहण में तेज़ी लाने को कहा गया है. डिपार्टमेंट का लक्ष्य है कि जरूरी जमीन का कम से कम 90% हिस्सा हासिल कर लिया जाए ताकि डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (DPRs) को बिना किसी देरी के मंज़ूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट को भेजा जा सके.
खास बात यह है कि 145 किलोमीटर लंबा मसरख-चकिया-भीठामोर स्ट्रेच राम जानकी सर्किट का हिस्सा है जो एक महत्वपूर्ण धार्मिक रास्ता है. यह सिवान, मसरख, चकिया और सीतामढ़ी से होकर गुजरता है. यह हाईवे आखिर में भारत-नेपाल सीमा पर भीठामोर पहुंचता है. इसके धार्मिक और राजनीतिक महत्व के कारण राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को जल्दी पूरा करना चाहती है.
इसी तरह 89 किलोमीटर लंबा अरवल-जहानाबाद-बिहार शरीफ फोर-लेन कॉरिडोर नालंदा और पटना के बीच यात्रा को बेहतर बनाएगा. इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने की उम्मीद है.
इसी वजह से मुख्यमंत्री कार्यालय जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पर करीब से नजर रख रहा है. अधिकारियों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से बड़ी आबादी को फायदा होगा और स्थानीय विकास को बढ़ावा मिलेगा.
हाल ही में डेवलपमेंट कमिश्नर मिहिर कुमार सिंह ने 2025-26 के सालाना एक्शन प्लान के तहत 52 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की. इन प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत ₹33,464 करोड़ है.
इनमें अनीसाबाद-AIIMS एलिवेटेड कॉरिडोर, विक्रमशिला ब्रिज, औरंगाबाद फोर-लेन बाईपास और सिंहेश्वर बाईपास जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं.
रिव्यू के दौरान डेवलपमेंट कमिश्नर ने डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में हो रही देरी पर चिंता जताई. इसलिए, उन्होंने अधिकारियों को दो महीने के अंदर रिपोर्ट पूरी करने का निर्देश दिया.
इस कदम से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से जल्दी मंज़ूरी मिलने में मदद मिलेगी. केंद्रीय कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद, केंद्र सरकार से फंडिंग शुरू हो जाएगी.
इससे पहले 22 जनवरी को RCD सेक्रेटरी पंकज कुमार पाल ने भी इन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की थी. उन्होंने अच्छी क्वालिटी की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (DPRs) और काम को समय पर पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया.
उन्होंने इंजीनियरों और कंसल्टेंट्स को किसी भी समस्या की तुरंत रिपोर्ट करने का निर्देश भी दिया. उन्होंने कहा कि इससे ऊपरी लेवल पर समस्याओं को जल्दी हल करने में मदद मिलेगी.
कुल मिलाकर, इन हाईवे से राम जानकी मार्ग पर धार्मिक टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जो अयोध्या और जनकपुर को जोड़ता है इसके अलावा, अरवल-बिहार शरीफ स्ट्रेच से लगभग 1 मिलियन लोगों को फायदा होने की संभावना है.
जमीन अधिग्रहण और DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की तैयारी पर कड़ी नजर रखी जा रही है इसलिए रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट (RCD) प्रोग्रेस को लेकर कॉन्फिडेंट है. नतीजतन दोनों बड़े हाईवे प्रोजेक्ट पर कंस्ट्रक्शन अगले फाइनेंशियल ईयर में शुरू होने की उम्मीद है.
पूरा होने के बाद, इन प्रोजेक्ट से बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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