239
Bihar Police Heroic Act: बिहार (Bihar) के भागलपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना उस वक्त होते-होते बची, जब डायल 112 पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने अपनी सूझबूझ और हिम्मता से इंसानियत की मिसाल कायम की. यह घटना यह भी दिखाती है कि वर्दी सिर्फ़ कानून लागू नहीं करती, बल्कि सही समय पर लिया गया एक मानवीय फ़ैसला किसी की पूरी दुनिया बचा सकता है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें की पूरा मामला क्या है?
क्या है पूरा मामला?
नवगछिया डायल 112 में तैनात सब-इंस्पेक्टर सिकंदर कुमार रात की ड्यूटी पूरी करके अपनी मोटरसाइकिल से भागलपुर में अपने किराए के कमरे में लौट रहे थे. जैसे ही वह नवगछिया में ज़ीरो माइल के पास विक्रमशिला पुल पर पहुंचे, उन्होंने देखा कि एक महिला, जिसकी गोद में लगभग छह महीने का बच्चा था, पुल से गंगा नदी में कूदने की कोशिश कर रही थी. स्थिति की गंभीरता को तुरंत समझते हुए, सब-इंस्पेक्टर ने बिना एक पल की भी देरी किए अपनी मोटरसाइकिल रोकी और पूरी ताक़त से दौड़कर महिला की साड़ी पकड़ ली. उनकी तेज़ी से की गई कार्रवाई से महिला और बच्चा दोनों पुल से गिरने से बच गए.
महिला को शांत करवाया
घटना के बाद, सब-इंस्पेक्टर सिकंदर कुमार ने न सिर्फ़ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि परेशान और मानसिक रूप से परेशान महिला को शांत किया और उसे दिलासा दिया. उन्होंने उसे भरोसा दिलाया कि हर समस्या का समाधान होता है. इसके बाद महिला और बच्चे को सुरक्षित रूप से बरारी टीओपी पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया.
क्यों करने जा रही थी महिला आत्महत्या?
शुरुआती पूछताछ के दौरान, महिला ने बताया कि वह नवगछिया पुलिस ज़िले के परबत्ता पुलिस स्टेशन इलाके के राघोपुर गांव की रहने वाली है. उसने बताया कि उसने पारिवारिक झगड़ों और मानसिक तनाव के कारण यह बड़ा कदम उठाया था. वह अपने बच्चे को पीछे नहीं छोड़ सकती थी, इसलिए वह बच्चे को अपने साथ पुल पर ले आई थी. पुलिस ने महिला को काउंसलिंग और ज़रूरी मदद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
स्थानीय लोगों ने पुलिस कि तारीफ की
इस बीच, स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों ने सब-इंस्पेक्टर सिकंदर कुमार की बहुत तारीफ़ की है. लोगों ने कहा कि अगर उन्होंने एक पल की भी देरी की होती, तो नतीजे दुखद हो सकते थे. उनकी संवेदनशीलता और समर्पण ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस सेवा सिर्फ़ एक नौकरी नहीं है, बल्कि इंसानियत की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी भी है.