भेदभाव और पसंद की आज़ादी से इनकार के आरोप
जॉइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को विभिन्न रेलवे यूनियनों (AILRSA, AIGC, ECREU, ECRKU और मजदूर कांग्रेस) का समर्थन मिला है. प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि रेलवे प्रशासन दोहरा मापदंड अपना रहा है. डिवीजन के पुनर्गठन के बाद, अन्य सभी विभागों के कर्मचारियों को अपनी पसंद का स्टेशन चुनने का विकल्प दिया गया था. हालांकि, यह विकल्प रनिंग स्टाफ को नहीं दिया गया. 78 कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना या विकल्प के एकतरफा प्रशासनिक आदेश से ट्रांसफर कर दिया गया, जिसे प्रदर्शनकारियों ने समानता के उनके संवैधानिक अधिकार का सीधा उल्लंघन बताया है.
परिवार और बच्चे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए
रविवार का दिन इस आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि तय कार्यक्रम के अनुसार, रनिंग स्टाफ की पत्नियां और बच्चे विरोध स्थल पर पहुंचे और कड़ाके की ठंड में अपने पतियों और पिताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए. “हमें न्याय चाहिए” और “अन्यायपूर्ण ट्रांसफर वापस लो” जैसे नारों वाले पोस्टर लेकर, परिवार के सदस्यों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए. परिवारों का कहना है कि इन अचानक ट्रांसफर से उनके बच्चों की पढ़ाई और घर की व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ जाएगी.
सुरक्षा संकट गहराने की चेतावनी
यूनियन नेताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रनिंग स्टाफ रेलवे संचालन की रीढ़ हैं. अगर लोको पायलट और गार्ड भारी मानसिक तनाव और गुस्से में हैं, तो यह रेलवे सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है. कर्मचारियों ने यह साफ कर दिया है कि जब तक जॉइंट प्रोसेस ऑर्डर (JPO) जारी नहीं होता और पोस्टिंग स्वैच्छिक आधार पर नहीं होती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
यह धरना प्रदर्शन, जो रोज़ाना सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक होता है, तब तक जारी रहेगा जब तक ट्रांसफर आदेश तुरंत रद्द नहीं कर दिए जाते. जॉइंट एक्शन कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर रेलवे प्रशासन जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानता है, तो आंदोलन और तेज़ हो सकता है, और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी समस्तीपुर रेलवे डिवीज़न प्रशासन की होगी. मुज़फ़्फ़रपुर जंक्शन पर विरोध प्रदर्शन से रेलवे विभाग में काफी दिक्कतें हुई हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है.