Loco Pilot Viral News: बिहार के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर एक बेहद ही अनोखा मामला सामने आया है जिसकी चारों तरफ चर्चा की जा रही है. दरअसल, मालदा से सिलीगुड़ी जा रही एक ट्रेन दोपहर 2:52 बजे जैसे ही ठाकुरगंज पहुंची, वहां लोको पायलट ने ट्रेन आगे ले जाने से पूरी तरह से साफ इनकार कर दिया. तो वहीं, दूसरी तरफ इसी बीच यह खबर सुनते ही हजार यात्री हक्के-बक्के रह गए. यात्री यह समझ नहीं पाए कि अचानक ट्रेन क्यों रुक गई है. हालांक, पूछताछ करने पर पता चला कि लोको पायलट की निर्धारित 9 घंटे की शिफ्ट पूरी हो चुकी थी और उसने थकान का हवाला देते हुए बिना आराम के काम करने से पूरी तरह से मना कर दिया था.
इस दौरान रेलवे अधिकारियों ने उसे काफी ज्यादा मनाने की भी काफी कोशिश की, लेकिन लोको पायलट अपनी बात पर अड़ा रहाय. उसन यह हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा मानकों के लिहाज से बिना आराम किए अगली शिफ्ट जारी रखना बिल्कुल भी संभव नहीं है. लोको पायलट की इस हरकत करने की वजह से ट्रेन लगभग 3 घंटे तक प्लेटफॉर्म पर ही खड़ी रही. जिसके बाद यह हुआ कि पास के स्टेशन से एक ‘रिलीफ ड्राइवर’ को बुलाना पड़ा, जिसके बाद ही ट्रेन ने अपनी आगे की यात्रा की शुरुआत की.
क्या है रेलवे के नियम और लोको पायलट का तर्क?
तो वहीं, रेलवे की गाइडलाइंस की तरफ नजर डालें तो, एक लोको पायलट की ड्यूटी को लेकर सख्त प्रावधान हैं, जो यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं. जिसमें पहला है कि एक लोको पायलट एक बार में अधिकतम 9 से 10 घंटे ही काम कर सकता है. दूसरा अगर लोको पायलट को अपनी ड्यूटी बढ़ानी हो, तो पायलट को 9 घंटे पूरे होने से कम से कम 2 घंटे पहले सूचना देना बेहद ही जरूरी हो जाता है. और तीसरा कुल ड्यूटी 11 घंटे से ज्यादा नहीं हो सकती है. इसके साथ ही खास परिस्थितियों में, अगर गंतव्य करीब हो, तो इसे अधिकतम 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है,
हांलाकि, अब इस मामले में लोको पायलट का तर्क नियमों के दायरे में था. बेशक यात्रियों को घंटों की देरी का सामना करना पड़ा, लेकिन एक थके हुए लोको पायलट से ट्रेन चलाना रेलवे सुरक्षा के नियमों का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है. इसके साथ ही यह घटना कार्यस्थल पर थकान और सुरक्षा मानकों के बीच के संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस खड़ा कर गई है.