Education and Engineering Success: बिहार के गया जिले से बेहद ही अनोखा मामला सामने आया है. जिससे पूरे प्रदेसभर में खुशी की लहर देखने को मिल रही है. दरअसल, जो बस्ती कभी केवल बुनाई के लिए जानी जाती थी, आज वह इंजीनियरों की फैक्ट्री के रूप में देशभर में पहचानी जा रही है. जहां, हाल ही में जारी हुए जेईई मेंस 2026 (फेज-1) के परिणामों ने एक बार फिर इस छोटे से इलाके का लोहा मनवाया है, जहां तीन दर्जन से ज्यादा छात्रों ने पूरे बिहार में सफलता का एक बार फिर से न सिर्फ परचम लहराया है बल्कि बिहार का नाम रोशन भी किया है.
सीमित संसाधन, असीमित सपने
पटवा टोली की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यहां के अधिकांश छात्र बेहद ही साधारण परिवारों से आते हैं. तो वहीं, जहां कई छात्रों के माता-पिता आज भी पारंपरिक बुनकरी या छोटे व्यवसायों से जुड़े हैं. दूसरी तरफ आर्थिक तंगी के बावजूद भी यहां के बच्चों ने वो कर दिखाया है जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा.
सफलता का मूल मंत्र और सामूहिक कोशिश
पटवा टोली की सफलता का राज केवल सेल्फ स्टडी’ और ‘सामूहिक सहयोग’ में छिपा है. दरअसल, यहां के सफल छात्र, जो अब आईआईटी (IIT) में पढ़ रहे हैं, छुट्टियों में वापस आकर अपने छोटे भाई-बहनों का मार्गदर्शन करते हैं. जिनमें आकांक्षा, विद्या रानी और मनीषा जैसी छात्राओं का मानना है कि अनुशासन, नियमित अभ्यास और आईआईटी के शिक्षकों से मिलने वाला मार्गदर्शन उनकी सफलता की कुंजी बन गया है.
प्रमुख सफल छात्र और उनके पर्सेंटाइल
1. अगस्त्य: 99.76
2. अदरिजा: 99.00
3. 98.87
4. ओम: 97.65
5. आकांक्षा: 97.23
6. प्रतीक: 96.71
संस्था के संस्थापक ने मामले में क्या दी जानकारी?
तो वहीं, इस मामले में संस्था के संस्थापक चंद्रकांत पाटेश्वरी ने जानकारी देते हुए कहा कि पटवा टोली अब केवल एक मोहल्ला नहीं, बल्कि एक शैक्षणिक आंदोलन बन चुका है.
इसके साथ ही यहां की संस्थाएं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निःशुल्क या नाममात्र शुल्क पर शिक्षा प्रदान करने में जुटी हुई है. ‘विलेज ऑफ आईआईटियन’ का यह खिताब यहां के छात्रों की कड़ी मेहनत और समाज के आपसी सहयोग का परिणाम दर्शाता है. इसके साथ ही इन बच्चों का एकमात्र लक्ष्य अब देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में दाखिला लेकर राष्ट्र सेवा करना है.