भागलपुर में होलिका दहन के दौरान एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है वायरल वीडियो में गोपालपुर विधानसभा के पूर्व विधायक गोपाल मंडल हाथ में हथियार लहराते हुए नजर आ रहे हैं वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है. बताया जा रहा है कि होलिका दहन कार्यक्रम के दौरान यह वीडियो बनाया गया जिसमें पूर्व विधायक कथित रूप से हथियार लेकर मौजूद दिखाई दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मामले ने तूल पकड़ लिया.
भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं. जांच की जिम्मेदारी जिला स्तर के वरीय पदाधिकारी को सौंपी गई है पुलिस यह जांच कर रही है कि वीडियो की सत्यता क्या है और हथियार लाइसेंसी था या नहीं गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब गोपाल मंडल का नाम हथियार को लेकर विवाद में आया हो. इससे पहले विधायक रहते हुए वे पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल मायागंज अस्पताल में भी हथियार के साथ पहुंचे थे जिसे लेकर काफी चर्चा हुई थी.
सिटी DSP का बयान
सिटी डीएसपी अजय चौधरी ने बताया की गोपाल मंडल के ऊपर प्राथमिक की दर्ज किया गया है फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है. मामले की जानकारी देते हुए, सिटी DSP अजय चौधरी ने कहा कि पूर्व MLA के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है. उन्होंने साफ किया कि पुलिस वीडियो के हर पहलू की अच्छी तरह से जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पहले भी विवादों में रहे हैं.
कौन हैं गोपाल मंडल?
गोपाल मंडल पहले जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े थे, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया और उनकी जगह शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को गोपालपुर सीट से टिकट दे दिया. जेडीयू से टिकट नहीं मिलने के बाद गोपाल मंडल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
यह पहली बार नहीं है जब गोपाल मंडल अपने हथियार के इस्तेमाल को लेकर सुर्खियों में आए हैं. इससे पहले, जब वे MLA थे, तो भागलपुर के मायागंज हॉस्पिटल में अपनी रिवॉल्वर लेकर घुसने को लेकर विवादों में रहे थे. बार-बार हथियार दिखाने की घटनाओं ने पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी कर दी है.
पुलिस अब जांच कर रही है कि यह सिर्फ दिखावा था या इसके पीछे कोई और मकसद था. अगर हथियार गैर-कानूनी या लाइसेंस वाले हथियार के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो पूर्व MLA की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.