झारखंड : झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक पिता अपने नवजात शिशु के शव को वहां के सरकारी अस्पताल से अपने गांव तक एक डिब्बे में ले गया. इस घटना के बाद अधिकारियों ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि आखिर एम्बुलेंस क्यों नहीं मुहैया कराई गई.
जन्म के कुछ ही समय बाद मौत
अधिकारियों के मुताबिक, कराईकेला पुलिस थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव के निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रोम ने अपनी गर्भवती पत्नी रीता तिरिया को 5 मार्च को डिलिवरी के लिए चक्रधरपुर उपमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था. बिते शनिवार को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन नवजात शिशु की जन्म के कुछ ही समय बाद मौत हो गई.
एम्बुलेंस सुविधा नहीं मिला
बच्चे की मौत होने के बाद, रामकृष्ण हेमब्रोम ने नवजात शिशु के शव को एक डिब्बे में रखा और उसे अपने गांव को ले गए. उन्होंने आगे बताया कि मृत्यु के बाद अस्पताल अधिकारियों ने उन्हें किसी एम्बुलेंस या शव वाहन की सुविधा के बारे में नहीं बताया, इसलिए उन्होंने एक ई-रिक्शा किया.
लोगों के खिलाफ होगी कार्रवाई
पीटीआई ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय सिंह के हवाले से कहा गया है कि, हमें चक्रधरपुर उपमंडल अस्पताल में हुई घटना के आरोपों की जानकारी मिली है. हम आगे इसकी जांच शुरू करेंगे और इसमें शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
भ्रूण की हृदय गति कम
चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमन शर्मा के मुताबिक महिला को 5 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि भ्रूण की हृदय गति कम थी और मां भी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित बताई गई.
गांव वालों में आक्रोश
गांववालों का कहना है की गांव के गरीब मरीजों के साथ अक्सर अस्पतालों में सौतेला व्यवहार किया जाता है. अगर इच्छा होती तो एंबुलेंस से शव और परिजनों को घर पहुंचा सकते थे.