C Tyagi: कभी जनता दल यूनाइटेड के दिग्गज नेताओं में शुमार पूर्व राज्यसभा सांसद केसी त्यागी अब मुश्किल में घिर गए हैं. पिछले कुछ महीनों से JDU उनके किसी बयान पर तवज्जो नहीं दे रही है. यहां तक कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग करने वाले पूर्व सांसद केसी त्यागी से भी JDU ने किनारा कर लिया है. केसी त्यागी के बयान पर जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने शनिवार को कहा कि हाल के दिनों में केसी त्यागी के कई बयान आए हैं, ये पार्टी के आधिकारिक स्टैंड नहीं हैं.
JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि त्यागी की ओर से भारत रत्न देने की मांग का जिक्र नहीं किया है. उन्होंने यह भी कहा कि केसी त्यागी इसे निजी क्षमता में दे रहे हैं. उन्होंने कटाक्ष के लहजे में यहां तक कह दिया कि JDU के कार्यकर्ताओं को तो यह भी पता नहीं है कि केसी ज्यागी जदयू में हैं या नहीं? उनके वक्तव्यों को जदयू से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए. वहीं, माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत रत्न की मांग को पसंद नहीं किया है. यहां पर बता दें कि केसी त्यागी का बयान शुक्रवार को आया था, जबकि इस पर जदयू की प्रतिक्रिया शनिवार की सुबह आई. राजीव रंजन की शनिवार की प्रतिक्रिया से साफ हो गया है कि उनकी यह भूमिका भी समाप्त हो गई है. माना जा रहा है कि हो सकता है कि केसी त्यागी से JDU से मुक्ति पाने का एलान ही कर दे.
क्या थी केसी त्यागी की मांग
पूर्व राज्यसभा सांसद केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर कहा था कि नीतीश कुमार समाजवादी आन्दोलन के अनमोल रत्न हैं. त्यागी ने समाजवादी पृष्ठभूमि के संदर्भ स्व. चौधरी चरण सिंह एवं स्व. कर्पूरी ठाकुर की चर्चा की थी, जिन्हें नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत रत्न दिया गया. उन्होंने पत्र में जिक्र किया कि इससे पहले भी कई जीवित राजनेताओं को यह सम्मान दिया जा चुका है। इससे पहले भी कई नेताओं ने नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी.
JDU से अलग स्टैंड से लेते रहे हैं केसी त्यागी
वर्ष 2024 में फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत सरकार से अलग स्टैंड लिया था. इन विवादों के चलते उन्हें सितंबर 2024 में राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा था. समाजवादी नेताओं में शुमार केसी त्यागी पिछले कुछ महीनों से कई विवादों में रहे हैं. उन्होंने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी को हटाने के फैसले का विरोध किया था. यहां पर बता दें कि JDU का बिहार में भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन है. ऐसे में कई मुद्दों पर भाजपा का अप्रत्यक्ष तौर पर विरोध करना JDU को पसंद नहीं आ रहा है.