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Khan Sir Viral Video: खान सर (Khan Sir) को कौन नहीं जानता, पटना के ये मशहूर टीचर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वे एक ऐसी कहानी सुना रहे हैं जो किसी बॉलीवुड थ्रिलर की याद दिलाती है. खान सर बताते हैं कि कैसे पटना के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने एक बार उन्हें अरेस्ट करने का ऑर्डर दिया था. खान सर को पुलिस से बचने के लिए रातों-रात शहर छोड़ना पड़ा था. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें की यह पूरा माजरा क्या है.
कब की है घटना?
जानकारी के मुताबिक, खान सर ने वीडियो में कोई खास तारीख तो नहीं बताई, लेकिन उन्होंने दो बड़ी घटनाओं का ज़िक्र किया. जिसमें RRB-NTPC आंदोलन (2022) जब बिहार में रेलवे एग्जाम के रिज़ल्ट को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, और खान सर के खिलाफ स्टूडेंट्स को भड़काने के लिए FIR दर्ज की गई और BPSC आंदोलन (दिसंबर 2024) जब कैंडिडेट्स के सपोर्ट में गर्दनीबाग में प्रदर्शन हुआ, और रोशन आनंद और गुरु रहमान जैसे कई कोचिंग इंस्टीट्यूट पुलिस की जांच के दायरे में आए. खान सर ने साफ किया कि वह 4-5 दिन बाद पटना तभी लौटे जब उन्हें भरोसा दिलाया गया कि स्टूडेंट्स के रिज़ल्ट बदल दिए जाएंगे और मामला सुलझ गया.
कैसे बचे खान सर?
खान सर ने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला कि FIR हो गई है और पुलिस उन्हें ढूंढ रही है, उन्होंने तुरंत भागने का प्लान बनाया. पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए उन्होंने कुछ मास्टरस्ट्रोक इस्तेमाल किए. जिसमें खान सर ने अपना मोबाइल फोन पटना में ही छोड़ दिया ताकि टावर लोकेशन से उन्हें ट्रेस न किया जा सके और दूसरा उन्होंने अपनी गाड़ी से FASTag हटा दिया ताकि टोल प्लाजा पर उनकी डिजिटल लोकेशन ट्रेस न हो सके. उन्होंने कैश में पेमेंट किया और दोगुना टोल भी दिया. पुलिस को गुमराह करने के लिए उन्होंने अपनी कार दिल्ली भेजी और एक ऑटो-रिक्शा लेकर वृंदावन की तंग गलियों में गायब हो गए.
खान सर ने पांच दिन कहां बिताए?
वृंदावन पहुंचने के बाद खान सर पूरी तरह भक्ति में डूब गए. उन्होंने मजाक में कहा कि मैं भगवान कृष्ण के पास पहुंच गया हूं, जो जेल में पैदा हुए थे; अब वही मुझे बचाएंगे. प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम के साधु-संतों के बीच वे गुमनाम रहे. बिना मोबाइल फोन के वे राधा-राधा जपते रहे और वृंदावन की सुबह की ताजी हवा का आनंद लेते रहे. उन्होंने वहां की मशहूर कचौरी की तारीफ करते हुए उसे अमृत कहा था.