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NEET छात्रा की मौत के बाद अब इंजीनियरिंग स्डूडेंट की मौत, कॉलेज में मचा बवाल, प्रिंसिपल पर लगाए गंभीर आरोप

Engineering Student Death: सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की फाइनल ईयर की छात्रा मेधा पराशर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इससे कॉलेज कैंपस में गुस्सा फैल गया है.

Written By: Shristi S
Last Updated: January 24, 2026 18:22:26 IST

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Samastipur Engineering Student Death: बिहार की राजधानी पटना में एक NEET छात्रा की मौत का रहस्य अभी तक सुलझा भी नहीं है और अब समस्तीपुर में एक बड़ी घटना सामने आ रही है. जिसने सबको हैरान कर दिया है. वहां के एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की फाइनल ईयर की छात्रा मेधा पराशर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इससे कॉलेज कैंपस में गुस्सा फैल गया है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें की पूरी खबर क्या है.

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, मेधा पराशर भागलपुर जिले की रहने वाली थी. 23 जनवरी को छात्रा की अचानक तबीयत खराब हो गई.  लेकिन उसकी गंभीर हालत के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने उसे तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचाया. छात्रों का आरोप है कि जब मेधा की हालत बिगड़ी, तो उसे प्रिंसिपल की कार से अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन प्रिंसिपल ने कथित तौर पर उसे बीच रास्ते में ही कार से उतार दिया, यह कहते हुए कि कार गंदी हो जाएगी.

छात्रों में भारी गुस्सा

इस घटना से छात्रों में भारी गुस्सा है और वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कॉलेज कैंपस में बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है. छात्रों का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है.

NEET छात्रा की मौत के मामले में क्या आया सामने?

इस बीच, पटना NEET छात्रा की मौत के मामले में, SIT ने मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दूसरी राय के लिए AIIMS भेजी थी. इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. हालांकि, AIIMS के डॉक्टरों के अनुसार, SIT टीम ने अधूरे दस्तावेज जमा किए हैं. अधूरे दस्तावेजों के कारण जांच प्रक्रिया में बाधा आ रही है.
इस मामले में, पटना AIIMS के फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. विनय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच के लिए AIIMS द्वारा बनाई गई टीम में 5 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं. इसमें फोरेंसिक विभाग के दो विशेषज्ञ और स्त्री रोग, न्यूरोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों से एक-एक विशेषज्ञ शामिल हैं. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ने पर और विशेषज्ञों को जोड़ा जाएगा. मेडिकल जांच समय और दस्तावेजों पर आधारित होती है. यदि रिकॉर्ड देर से मिलते हैं, तो समीक्षा में कुछ देरी होगी. जब तक सभी दस्तावेजों की जांच नहीं हो जाती, तब तक इस समय किसी भी नतीजे पर पहुंचना संभव नहीं है. SIT टीम धीरे-धीरे दस्तावेज उपलब्ध करा रही है.

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