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Bihar News: जनसुराज पार्टी की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से जुड़ा है मामला

Bihar News: देश की सर्वोच्च न्यायालय माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: February 6, 2026 12:07:16 IST

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Bihar News: देश की सर्वोच्च न्यायालय माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को चुनौती देने और नए चुनाव कराने की मांग वाली याचिका पर प्रशांत किशोर को झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने JSP को हाई कोर्ट जाने को कहा.

माननीय CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह छूट देते हुए याचिका को वापस लिया गया मानकर खारिज कर दिया. JSP ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों को अमान्य घोषित करने और नए चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की थी. 

प्रशांत किशोर की याचिका खारिज

CJI कांत ने कहा कि आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? अगर लोग आपको नकार देते हैं, तो आप लोकप्रियता पाने के लिए न्यायिक मंच पर जाते हैं. BJP के नेतृत्व वाले NDA ने राज्य में कुल 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, जबकि INDIA गठबंधन को सिर्फ़ 35 सीटें मिलीं. इसमें कांग्रेस की छह सीटें शामिल हैं.

खाता भी नहीं खुला

बता दें कि जन सुराज पार्टी विधानसभा चुनावों में अपना खाता खोलने में नाकाम रही. उसके ज्यादातर उम्मीदवारों की जमानत ज़ब्त हो गई. एडवोकेट आदित्य सिंह के ज़रिए आर्टिकल 32 के तहत दायर जन सुराज की याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना में नए लाभार्थियों को शामिल किया जाए. साथ ही आचार संहिता लागू रहने के दौरान उन्हें भुगतान करना अवैध और संविधान के आर्टिकल 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन शामिल था. मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने और राज्य में स्वरोज़गार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 10,000 रुपये का शुरुआती वित्तीय अनुदान देती है.

इसमें चुनाव आयोग को भारत के संविधान के आर्टिकल 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (जो भ्रष्ट आचरण से संबंधित है) के तहत बिहार चुनावों में 25-35 लाख महिला मतदाताओं को 10,000 रुपये सीधे ट्रांसफर करने के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी. इसमें जीविका समूहों से 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथ पर तैनात करने को अवैध घोषित करने की भी मांग की गई थी.

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Last Updated: February 6, 2026 12:07:16 IST

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