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Syed Ata Hasnain: 40 साल सेना में सेवा, अब राज्य के गवर्नर… लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन बनें बिहार के 43वें राज्यपाल

सैयद अता हसनैन शपथ ग्रहण: आज लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू ने लोक भवन में उन्हें पद की शपथ दिलाई.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-14 16:26:51

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Bihar Governor Syed Ata Hasnain: लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने शनिवार को बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली. पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू ने लोक भवन में उन्हें पद की शपथ दिलाई. इससे पहले, आरिफ मोहम्मद खान इस पद पर थे.
 
 शपथ ग्रहण समारोह के दौरान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, और मंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव साथ ही उनके मंत्रिमंडल के कई अन्य सदस्य कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे. सैयद अता हसनैन ने हिंदी में शपथ ली. इसके बाद, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्यपाल की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पत्र पढ़कर सुनाया.
 

सैयद अता हसनैन ने 40 साल तक देश की सेवा की

सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के एक अनुभवी अधिकारी हैं. उन्होंने सेना में लगभग 40 वर्षों तक सेवा की और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए. उन्होंने जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने ‘हार्ट्स एंड माइंड्स’ (Hearts and Minds) रणनीति के माध्यम से स्थानीय लोगों का दिल जीतने का काम किया. उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक और उत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है.
 
इससे पहले, उन्होंने जम्मू और कश्मीर में सेना की 15वीं कोर की कमान संभाली थी. अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी, हसनैन राष्ट्रीय और शैक्षणिक भूमिकाओं में सक्रिय रहे. उन्हें 2018 में कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था. 2020 में, वे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) में एक सदस्य के रूप में शामिल हुए.
 

सैयद हसनैन चिनार कोर के कमांडर-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दे चुके 

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर के पूर्व कमांडर-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दे चुके हैं. उन्होंने कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में कार्य किया. सेना में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई सामाजिक पहलों का नेतृत्व किया; उन्होंने युवाओं की शिक्षा, रोज़गार और खेल पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित किए, जिनका उद्देश्य लोगों को ज़िम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना था.
 
 रिटायरमेंट के बाद भी, वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा को रोज़गार से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए कई अभियानों का नेतृत्व किया इन प्रयासों में कश्मीर के युवाओं को जोड़ने पर विशेष ज़ोर दिया गया था. इसी कारण, उन्हें केवल एक सैन्य अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक रणनीतिक विचारक के रूप में भी देखा जाता है.
 

5 मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू ने हसनैन को किया था नियुक्त

हसनैन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 5 मार्च, 2026 को नियुक्त किया गया था. वे आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लेंगे, जिन्होंने जनवरी 2025 में पदभार ग्रहण किया था. हसनैन की सैन्य पृष्ठभूमि और अनुभव को देखते हुए, बिहार में सुरक्षा और प्रशासन के क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद की जा रही है.

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Last Updated: 2026-03-14 16:26:51

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Bihar Governor Syed Ata Hasnain: लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने शनिवार को बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली. पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू ने लोक भवन में उन्हें पद की शपथ दिलाई. इससे पहले, आरिफ मोहम्मद खान इस पद पर थे.
 
 शपथ ग्रहण समारोह के दौरान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, और मंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव साथ ही उनके मंत्रिमंडल के कई अन्य सदस्य कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे. सैयद अता हसनैन ने हिंदी में शपथ ली. इसके बाद, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्यपाल की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पत्र पढ़कर सुनाया.
 

सैयद अता हसनैन ने 40 साल तक देश की सेवा की

सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के एक अनुभवी अधिकारी हैं. उन्होंने सेना में लगभग 40 वर्षों तक सेवा की और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए. उन्होंने जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने ‘हार्ट्स एंड माइंड्स’ (Hearts and Minds) रणनीति के माध्यम से स्थानीय लोगों का दिल जीतने का काम किया. उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक और उत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है.
 
इससे पहले, उन्होंने जम्मू और कश्मीर में सेना की 15वीं कोर की कमान संभाली थी. अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी, हसनैन राष्ट्रीय और शैक्षणिक भूमिकाओं में सक्रिय रहे. उन्हें 2018 में कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था. 2020 में, वे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) में एक सदस्य के रूप में शामिल हुए.
 

सैयद हसनैन चिनार कोर के कमांडर-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दे चुके 

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर के पूर्व कमांडर-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दे चुके हैं. उन्होंने कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में कार्य किया. सेना में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई सामाजिक पहलों का नेतृत्व किया; उन्होंने युवाओं की शिक्षा, रोज़गार और खेल पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित किए, जिनका उद्देश्य लोगों को ज़िम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना था.
 
 रिटायरमेंट के बाद भी, वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा को रोज़गार से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए कई अभियानों का नेतृत्व किया इन प्रयासों में कश्मीर के युवाओं को जोड़ने पर विशेष ज़ोर दिया गया था. इसी कारण, उन्हें केवल एक सैन्य अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक रणनीतिक विचारक के रूप में भी देखा जाता है.
 

5 मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू ने हसनैन को किया था नियुक्त

हसनैन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 5 मार्च, 2026 को नियुक्त किया गया था. वे आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लेंगे, जिन्होंने जनवरी 2025 में पदभार ग्रहण किया था. हसनैन की सैन्य पृष्ठभूमि और अनुभव को देखते हुए, बिहार में सुरक्षा और प्रशासन के क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद की जा रही है.

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