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इन 2 चेहरों के खत्म होते ही मिट जाएगा ‘लाल आतंक’! एक पर करोड़ों का इनाम, सैकड़ों जवानों का है कातिल!

सैंकड़ों जवानों का हत्यारा नक्सली देवजी सरेंडर! अब सुरक्षाबलों के रडार पर हैं करोड़ों के इनामी 2 टॉप माओवादी लीडर. क्या बस्तर से मिटने वाला है आतंक का नामोनिशान?

Written By: Shivani Singh
Last Updated: February 24, 2026 18:16:26 IST

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बस्तर के ‘लाल गलियारे’ में दशकों से फैला खौफ अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. खूंखार नक्सली देवजी के सरेंडर और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव ने माओवादी साम्राज्य की कमर तोड़ दी है. गणपति और भास्कर जैसे बड़े चेहरों की घेराबंदी तेज हो गई है, जिससे अब 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की उम्मीद जगने लगी है. देवजी के सरेंडर से नक्सली संगठन पूरी तरह बिखर गया है. देवजी बस्तर में 131 से ज़्यादा जवानों का हत्यारा और ताड़मेटला-रानीबोदली हमले का मास्टरमाइंड है. देवजी के सरेंडर के बाद, कुछ ही टॉप माओवादी लीडर बचे हैं। माना जा रहा है कि उनके सरेंडर या एनकाउंटर से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा.

देवजी के बाद, रमन्ना और बेसरा संगठन में टॉप माओवादी लीडर हैं. उनके सरेंडर या एनकाउंटर से छत्तीसगढ़ का बस्तर लाल आतंक से आज़ाद हो जाएगा. कहा जा रहा है कि ये सभी एंटी-नक्सल कैंपेन के डर से अंडरग्राउंड हैं. इसके साथ ही, बस्तर में सिर्फ़ 200 नक्सली बचे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च, 2026 तक की डेडलाइन तय की है. बस्तर के अलग-अलग इलाकों में सिर्फ़ लगभग 200 नक्सली बचे हैं. नक्सली महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) ज़ोन खत्म हो गया है. नॉर्थ बस्तर और मढ़ डिवीज़न में भी नक्सलवाद को बड़ा झटका लगा है. साउथ बस्तर के जंगलों में माओवादी एक्टिव हैं, जिनमें उनके कुछ टॉप लीडर भी शामिल हैं.

गणपति पर 3.5 करोड़ से ज़्यादा का इनाम

गणपति को सबसे बड़ा नक्सली लीडर माना जाता है. उसे संगठन में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। उसे मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ ​​गणपति उर्फ ​​रमन्ना उर्फ ​​राजन्ना के नाम से जाना जाता है. उसके सिर पर अलग-अलग राज्यों में करीब 3.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. उसे अभी बस्तर में एक्टिव सबसे खतरनाक नक्सली माना जाता है. कहा जाता है कि गणपति 1992 में पीपुल्स वॉर ग्रुप का जनरल सेक्रेटरी बना था. उसने 2004 से 2018 तक CPI (माओवादी) के जनरल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. वह अभी नक्सल सेंट्रल कमेटी का सलाहकार है. माना जाता है कि वह सिक्योरिटी फोर्स के खिलाफ कई हमलों का मास्टरमाइंड है, जिसमें सुकमा के कडगाम गांव में हुआ धमाका भी शामिल है, जिसमें 35 आदिवासी मारे गए थे.

भास्कर पर 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा का इनाम

गणपति के बाद, मिशिर बेसरा उर्फ ​​भास्कर को अभी नक्सलियों का टॉप लीडर माना जाता है. कहा जाता है कि वह पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का मेंबर है. उसके सिर पर 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा का इनाम घोषित किया गया है. बेसरा लड़ाकों का ग्रुप बनाने, घात लगाने और बंकर बनाने में एक्सपर्ट है. उसे बस्तर समेत झारखंड में हुए कई नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड बताया जाता है. वह अपने इलाके में नए लोगों की भर्ती भी करता है. भास्कर के नाम का बस्तर में खौफ है. फिलहाल वह अंडरग्राउंड है. सुरक्षा बल लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे हैं.

2006 में, बीजापुर के उपलेटा कैंप पर हमला हुआ, जिसमें 22 पुलिसवाले मारे गए. मार्च 2007 में, दंतेवाड़ा के रानीबोदली हमले में 55 सैनिक शहीद हुए. 2010 में, ताड़मेटला में CRPF के काफिले पर हमला हुआ, जिसमें 76 सैनिक मारे गए. उसे झीरम घाटी हमले का भी मास्टरमाइंड माना जाता है, जिसमें कांग्रेस के एक बड़े नेता समेत 30 लोग मारे गए थे.

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